

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन बुधवार को छह दिन की यात्रा के बाद कोलकाता से रवाना हो गईं, लेकिन जाते-जाते उन्होंने इतना जरूर कहा कि जब भी यह शहर (कोलकाता) उन्हें बुलाएगा, वह यहां पहुंच जाएंगी। रवानगी से पहले हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई, लेकिन कहा कि फिलहाल वे भारत में ही रहेंगी क्योंकि ढाका ने न तो उनके पासपोर्ट का नवीनीकरण किया है और न ही उनके स्वीडिश पासपोर्ट पर उन्हें वीजा दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘बेशक मैं लौटना चाहती हूं। मैं 32 साल से निर्वासन में हूं। लेकिन मुझे बांग्लादेश वापस जाने की इजाजत नहीं है। ऐसा नहीं है कि मैं लौटना नहीं चाहती।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं हुआ है। इसलिए, फिलहाल मैं भारत में ही रहूंगी।’’ लगभग दो दशक बाद 31 जुलाई को कोलकाता पहुंचीं तसलीमा ने कहा कि वह ‘सुंदर यादों’ के साथ शहर से जा रही हैं और आम लोगों से मिले प्यार से वह बहुत अभिभूत हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास बहुत अच्छी यादें हैं। आम लोगों के प्यार ने मेरी आंखों में आंसू ला दिए।’’ उन्होंने कहा कि कोलकाता हमेशा से उनके दिल के करीब रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि वह अक्टूबर या अगले साल जनवरी में शहर लौट सकती हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह दुर्गा पूजा के दौरान शहर आएंगी, तसलीमा ने कहा कि उस समय उनके शहर में रहने की संभावना कम है क्योंकि तब वे विदेश में रह रह सकती हैं लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि वह कोलकाता पुस्तक मेले के लिए आएंगी। उनकी यह यात्रा उस घटना के 19 साल बाद हुई है जब उन्हें अपनी लेखनी को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। वर्ष 2007 के बाद शहर में यह उनकी पहली यात्रा थी। एक दिन पहले, तसलीमा ने कहा था कि बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका लौटने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना के सत्ता से बेदखल होने की दूसरी बरसी से पहले अवामी लीग पर से प्रतिबंध हटाने की भी मांग की।