सात साल की उम्र में गणित में किया गजब का प्रदर्शन

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भारतीय मूल का सात साल का लड़का जीव्यान रेड्डी ध्रुव, लंदनमें अपने माता-पिता ध्रुव कुमार रेड्डी कट्टा और ऐश्वर्या देवी ध्रुव के साथ।
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लंदन : भारतीय मूल के सात साल के एक लड़के ने ब्रिटेन में ज़्यादातर स्कूली बच्चों की तुलना में लगभग दस साल पहले ही गणित की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है और अगले स्तर की परीक्षा की तैयारी कर रहा है।

जिव्यान रेड्डी ध्रुव ने ‘जनरल सर्टिफ़िकेट ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन’ (जीसीएसई) परीक्षा के तीन प्रश्नपत्रों में 240 में से 196 अंक हासिल किए और उच्च स्तर की ‘ग्रेड 8’ (जो ए श्रेणी के बराबर है) प्राप्त की। यह परीक्षा आम तौर पर 16 साल के छात्र देते हैं। उसने मई में 'पियर्सन एडएक्सल जीसीएसई हायर मैथमेटिक्स' परीक्षा दी थी और पिछले हफ़्ते इसका परिणाम आया।

‘‘बड़े होकर मैं रोबोट और ऐसी दूसरी चीज़ें बनाना चाहता हूं जो लोगों की मदद करें। मैं ऐसी चीज़ें बनाना चाहता हूं जिनका इस्तेमाल हर कोई कर सके।’’

जिव्यान ने बताया, ‘‘अपना परिणाम देखकर मैं बहुत उत्साहित था। मेरे माता-पिता बहुत खुश थे और उन्होंने मुझे गले लगाया।’’

उसने कहा, ‘‘मैं ‘ग्रेड 9’ चाहता था, इसलिए शुरू में थोड़ा निराश हुआ, लेकिन फिर ‘ग्रेड 8’ मिलने पर बहुत खुश हुआ। मुझे गणित पसंद है क्योंकि मुझे मुश्किल सवाल हल करना और जवाब पाने के अलग-अलग तरीके खोजना अच्छा लगता है।’’ उसने कहा, ‘‘बड़े होकर मैं रोबोट और ऐसी दूसरी चीज़ें बनाना चाहता हूं जो लोगों की मदद करें। मैं ऐसी चीज़ें बनाना चाहता हूं जिनका इस्तेमाल हर कोई कर सके।’’

जिव्यान इस साल फ़रवरी तक लंदन के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। इसके बाद उसके माता-पिता – जो मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं और अब लगभग पांच साल से वेस्ट लंदन के साउथ रुइस्लिप में रह रहे हैं – ने उसे होम-स्कूलिंग (घर पर पढ़ाई) करानी शुरू कर दी ताकि वह अपनी तेज़ सीखने की क्षमता के हिसाब से पढ़ाई कर सके।

जिव्यान के पिता ध्रुव कुमार रेड्डी कट्टा याद करते हैं, ‘‘नर्सरी से पहले ही हमने देखा कि वह अंकों और गणित के सवाल बहुत तेज़ी से सीख रहा था। अगर हम उसे कोई चीज़ एक बार समझाते, तो वह अक्सर उसके पीछे का पैटर्न समझ जाता और ऐसे सवाल पूछने लगता जो हमारी सिखाई गई बातों से कहीं आगे के होते थे।’’

'जिव्यान बहुत ज़्यादा 'क्यों ?' पूछता है...'

वह मानते हैं कि घर पर पढ़ाना एक चुनौतीपूर्ण काम है और इसके लिए उनके बीच बहुत तालमेल की ज़रूरत होती है, लेकिन उन्होंने एक ऐसा तालमेल बना लिया है जिसमें उनके बेटे के लिए भी काफ़ी खाली समय होता है ताकि वह दूसरे बच्चों की तरह ज़िंदगी का मज़ा ले सके।

कट्टा ने कहा, ‘‘हम कोशिश करते हैं कि घर पर पढ़ाई-लिखाई क्लासरूम में पूरे दिन बैठने जैसा न लगे। जिव्यान बहुत ज़्यादा 'क्यों?' पूछता है और हम इसे बढ़ावा देते हैं। उसे बस कोई तरीका बताने के बजाय, हम उसे यह समझने में मदद करते हैं कि वह तरीका कैसे काम करता है और क्या उसी समस्या को हल करने का कोई और तरीका भी हो सकता है।’’

इतनी कम उम्र में जिव्यान का सपना एक आविष्कारक बनने और ऐसे रोबोट और तकनीक बनाने का है जो लोगों की मदद कर सकें। उसने ऐसी चीज़ें बनाने में दिलचस्पी दिखाई है जो सबके लिए उपयोगी और सस्ती हों, लेकिन उसके माता-पिता चाहते हैं कि वह अपने भविष्य के करियर का रास्ता खुद अपनी मर्ज़ी से और अपने समय पर चुने।

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