

प्रयागराज/वाराणसीः इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बटुकों के कथित यौन शोषण मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर शुक्रवार को रोक लगा दी और कहा कि निर्णय आने तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
अदालत ने राज्य सरकार एवं मुकदमा के वादी आशुतोष पांडेय को इस मामले में अपने जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया जिसके मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाए जाने की संभावना है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले की जांच में पुलिस का सहयोग करेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने कहा कि शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय काई आपराधिक मामलो में लिप्त रहे हैं और याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के इशारे पर इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित बटुक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में कभी नहीं रहे।
वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका की पोषणीयता पर यह कहते हुए सवाल किया गया कि अग्रिम जमानत याचिका सत्र अदालत में दायर करने के बजाय सीधे उच्च न्यायालय में दायर की गई है। इस बीच, उच्च न्यायालय का यह फैसला आने के बाद वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ में स्वामी के शिष्यों और भक्तों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर न्यायलय के इस फैसले पर अपनी ख़ुशी जताई।
वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘‘न्यायालय में हमारे अधिवक्ताओं ने कहा कि यह बच्चे हमारे यहां रहे ही नहीं। बच्चे भी कह रहे कि वे हमारे यहां नहीं बल्कि जोशी मठ में रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ''यह मुकदमा झूठा बनाया गया है। मुझे न्याय की उम्मीद हमेशा से रही है। हमारे वकीलों ने उच्च न्यायालय में अपनी बात रखी। बटुक कभी आश्रम में रहे ही नहीं है। इस घटना से पूरा हिन्दू समुदाय आहत था। न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते है।''
मुकदमा के वादी आशुतोष पांडेय ने कहा, “यह (गिरफ्तारी पर रोक) न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं है, अंतिम निर्णय आना बाकी है। हमें उम्मीद है कि मासूम बटुकों को न्याय मिलेगा। हम उच्च न्यायालय में हलफनामा और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।”
उल्लेखनीय है कि प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के निर्देश पर झूंसी पुलिस थाना में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई जिसमें उन पर बटुकों के साथ यौन शोषण का आरोप लगाया गया है।