

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस छोड़ चुके वरिष्ठ नेता एवं विधायक मदन मित्र ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पहल की सराहना की, जिसके तहत सत्ता और विपक्ष के सांसदों को एक साथ बैठक में आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारतीय राजनीति में नई मिसाल कायम की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी इसी तरह विपक्षी विधायकों को साथ लेकर चलेंगे और संवाद की राजनीति को बढ़ावा देंगे।
मदन मित्र ने कहा कि राजनीति कोई संग्रहालय नहीं, बल्कि बहती नदी की तरह है, जहां समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उनका कहना था कि विकास के लिए सत्ता और विपक्ष के बीच सहयोग आवश्यक है और जनता ने भी जनप्रतिनिधियों को इसी उद्देश्य से चुना है। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री सप्ताह में एक दिन विपक्षी विधायकों से सीधे संवाद करें।
इस दौरान मदन मित्र ने अपनी पूर्व पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके साथ काम करना संभव नहीं रह गया था, इसलिए उन्होंने अलग रास्ता चुना। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में राज्य की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार जिम्मेदार रही। उनका दावा था कि कई सांसद अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं और सत्तारूढ़ दल के नाम पर उनके कार्यों में बाधाएं डाली जा रही हैं।
ईडी में प्रस्तावित पेशी को लेकर उन्होंने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी पद या मंत्री पद की लालसा में राजनीतिक फैसला नहीं लिया, बल्कि जनता के हित में काम करने के उद्देश्य से नया रास्ता चुना है। पोस्टर विवाद पर उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि असली गद्दार कौन है।