‘युवाओं को शांत करने की जरूरत, संयम बरतें सुरक्षा बल’- CJP के प्रदर्शन के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को संयम बरतना चाहिए। कुछ ‘गुमराह तत्व’ पथराव भी करें, तब भी युवाओं को शांत किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि युवाओं को सही सलाह दिये जाने की जरूरत है। उन्हें सलाह के साथ ‘काउंसलिंग’ की जरूरत है। राज्य की ओर से कोई भी आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है तथा हिंसा को और भड़का सकता है। इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना के पीठ ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के गत 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के खिलाफ याचिका पर उक्त नसीहत दी। पीठ ने एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी की ओर से दायर इस याचिका को इसी ‘हिंसा भड़काने’ के आरोप में कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका के साथ जोड़ दिया। याची मनीष कुमार सोलंकी की ओर से पेश वकील रिजवान अहमद ने कहा कि 15 दिन बीत चुके हैं... आयोजकों की जवाबदेही का क्या? वे एक चैनल से दूसरे चैनल पर जाकर भड़काऊ बयान दे रहे हैं। राजस्थान में हाल में हुई कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते हुए वकील ने दलील दी कि सरकारों को प्रदर्शनकारियों की बात मानने के लिए ‘जरूरत से ज्यादा नहीं झुकना’ चाहिए। कल अगर लखनऊ में डिग्री कॉलेज के छात्रों की कोई मांग हो और वे बसों पर पत्थर फेंकने लगें तो क्या उत्तर प्रदेश सरकार भी जरूरत से अधिक झुकेगी? उनकी इस दलील पर पीठ ने कहा कि युवाओं को सही सलाह दिये जाने की जरूरत है। उन्हें सलाह के साथ ‘काउंसलिंग’ की जरूरत है। राज्य की ओर से कोई भी आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है तथा हिंसा को और भड़का सकता है। इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए।

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