

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
नयी दिल्ली/कोलकाता : सर्च कम स्लेक्शन कमेटी की तरफ से उपाचार्यों के पद के लिए सुझाए गए नामों पर राज्यपाल व मुख्यमंत्री को अगर कोई आपत्ति है तो इसका आधार क्या है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची के डिविजन बेंच ने इस बाबत दायर मामले की सुनवायी करते हुए यह आदेश दिया। राज्य के 15 विश्वविद्यालयों में उपाचार्यों के पद पर नियुक्ति की जानी है।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इससे पहले जुलाई में कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया था। कोर्ट ने 15 विश्वविद्यालयों के उपाचार्यों की नियुक्ति के मामले में वरीयता क्रम तय करने की जिम्मेदारी जस्टिस यू यू ललित की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंप दी थी। सर्च कम स्लेक्शन कमेटी की तरफ से सुनवायी के दौरान रिपोर्ट दाखिल की गई। अटर्नी जनरल आर वेंकटरमानी ने मामले की सुनवायी के दौरान कहा कि पिछली सुनवायी में आम सहमति से जिन 12 नामों की संस्तुति की गई थी उनमें से अधिकांश के बाबत राज्यपाल अपनी सहमति दे चुके हैं। अलबत्ता चार नामों को लेकर आपत्ति है। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पिछली सुनवायी में सुझाए गए 12 और हालिया रिपोर्ट में सुझाए गए एक नाम में से नौ नामों पर राज्य को कोई एतराज नहीं है। अलबत्ता चार नामों को लेकर आपत्ति है। इस लिए नौ नाम क्लियर किए जा सकते हैं। डिविजन बेंच ने टुकड़े टुकड़े में आदेश देने के बजाए इसकी सुनवायी छह अक्टूबर तक के लिए टाल दिया। डिविजन बेंच उसी दिन मुकम्मल आदेश देगा। जस्टिस सुर्यकांत ने कहा कि हमें यह जानना पड़ेगा कि आखिर मतभेद किन मुद्दों को लेकर है। उन्होंने कहा कि इसे जाने बगैर उपाचार्यों की नियुक्ति को लेकर जो विवाद बना हुआ है उसे हल नहीं किया जा सकता है।