

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों की कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय लिया गया है कि वर्तमान शुल्क संरचना में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा, क्योंकि ये सभी शैक्षणिक संस्थान आगे भी संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा वित्तपोषित होते रहेंगे। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में कई कॉलेजों के छात्र-छात्राएं तथा अभिभावक पिछले पाँच दिनों से जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका विरोध द्वीपसमूह में प्रस्तावित डीम्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि डीम्ड यूनिवर्सिटी के निर्णय को वापस लिया जाए और सभी सातों कॉलेजों को पहले की तरह पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाए। अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2025–26 के लिए संघ राज्य क्षेत्र के छह महाविद्यालयों— जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय , महात्मा गांधी गवर्नमेंट कॉलेज (एमजीजीसी), अंडमान कॉलेज , टैगोर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन, अंडमान लॉ कॉलेज तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह आयुर्विज्ञान संस्थान — की पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्धता के मुद्दे पर प्रशासन पहले ही भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से 2025-26 के लिए संबद्धता जारी रखने का अनुरोध कर चुका है। शैक्षणिक वर्ष 2025–26 के दौरान इन छह महाविद्यालयों की परीक्षाएं पांडिचेरी विश्वविद्यालय द्वारा समझौते की शर्तों के अनुसार आयोजित की जाएंगी और इन छात्रों को डिग्री भी पांडिचेरी विश्वविद्यालय से ही प्रदान की जाएगी। यह निर्णय शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने, छात्रों की पढ़ाई में किसी प्रकार का व्यवधान न आने देने तथा द्वीपों की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुगम परिवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस दौरान छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अब तक दिए गए आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का प्रस्ताव पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता और सातों कॉलेजों को पुनः पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।