दक्षिण अंडमान में आवारा पशु प्रबंधन व्यवस्था सुदृढ़

अंडमान में आवारा पशुओं की तस्वीर
अंडमान में आवारा पशुओं की तस्वीर
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 7 नवंबर को दिए गए महत्वपूर्ण आदेश के बाद दक्षिण अंडमान जिला प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने के लिए एक सशक्त, समन्वित और तकनीक-आधारित व्यवस्था लागू की है। यह कदम न केवल जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं, सार्वजनिक असुविधा और कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले जोखिम को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आवारा मवेशियों की अनियंत्रित आवाजाही से ट्रैफिक बाधित होता है, रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है और कई बार नागरिकों को सीधी चोट या संपत्ति का नुकसान भी उठाना पड़ता है। न्यायालय के आदेश के अनुरूप अब जिले में एक इंटीग्रेटेड रेस्पॉन्स सिस्टम लागू किया गया है, जिसके चलते किसी भी प्रकार की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप नंबर सक्रिय
प्रशासन ने शिकायतों को तेजी से प्राप्त करने और उन पर त्वरित कार्रवाई के लिए जिला नियंत्रण कक्ष के नंबरों को सक्रिय कर दिया है। अब नागरिक आवारा पशुओं की देखे जाने, उपद्रव, हमले, ट्रैफिक बाधा या सार्वजनिक खतरे से जुड़ी किसी भी घटना की रिपोर्ट सीधे इन हेल्पलाइन पर कर सकते हैं। इसके अलावा एक व्हाट्सऐप हेल्पलाइन भी जारी की गई है, जिसके माध्यम से लोग किसी घटना की फोटो, वीडियो, लोकेशन या लिखित जानकारी भेज सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि विजुअल सूचना मिलने से टीमों को वास्तविक स्थान तक पहुंचकर कार्रवाई करने में आसानी होती है।

फील्ड टीमें और त्वरित कार्रवाई
जिला प्रशासन ने पशु प्रबंधन से जुड़ी विशेष टीमों को तैनात किया है, जिसमें पशु चिकित्सा विभाग, नगर निकाय, स्थानीय पुलिस व कंट्रोल रूम के कर्मचारी शामिल हैं। इन्हें 24×7 उपलब्ध रहने और किसी भी सूचना मिलने पर जल्द से जल्द मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। पकड़े गए मवेशियों को निर्धारित शेल्टर स्थानों पर भेजा जाएगा, जहां उनकी उचित देखरेख की व्यवस्था होगी।

नागरिकों से सक्रिय सहयोग का आह्वान
प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे आवारा पशुओं को खुले में न छोड़ें और यदि किसी का निजी मवेशी सड़क पर पाया जाता है, तो उसके लिए संबंधित मालिक जिम्मेदार होगा। साथ ही लोगों से आग्रह किया गया है कि वे शिकायत दर्ज कराने में झिझक न दिखाएं और प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का समय पर उपयोग करें, ताकि जिले में आवारा पशु प्रबंधन को पूरी तरह प्रभावी बनाया जा सके।

इन सभी प्रयासों का उद्देश्य दक्षिण अंडमान को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और दुर्घटना-मुक्त क्षेत्र बनाना है, जहां नागरिक बिना किसी जोखिम के आवाजाही कर सकें और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन व स्वच्छता बनी रहे

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