जम्मू-कश्मीर में खुफिया अभियान तेज करें: सेना प्रमुख

उत्तर और मध्य कश्मीर के अग्रिम इलाकों का किया दौरा
अग्रिम चौकियों का निरीक्षण करते  थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ
अग्रिम चौकियों का निरीक्षण करते थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ
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श्रीनगर (जे के ब्यूरो): जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खतरों से निपटने के लिए सेना ने सतर्कता और खुफिया आधारित अभियानों को और मजबूत करने पर जोर दिया है। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को उत्तर और मध्य कश्मीर के अग्रिम इलाकों का दौरा कर वहां तैनात सुरक्षा बलों की अभियानगत तैयारियों और मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।

सेना प्रमुख ने कुपवाड़ा और बड़गाम सहित संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों, मौजूदा चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी ली।

चिनार कोर के तहत राष्ट्रीय राइफल्स के सेक्टर HQ पहुंचे

अतिरिक्त लोक सूचना महानिदेशालय (ADGPI) ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से सेना प्रमुख के दौरे की जानकारी साझा की। पोस्ट के अनुसार, जनरल सेठ ने श्रीनगर स्थित चिनार कोर के तहत राष्ट्रीय राइफल्स के सेक्टर मुख्यालय का दौरा किया और वहां अभियानगत तैयारियों की समीक्षा की।

अधिकारियों ने सेना प्रमुख को क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी दी। इसमें आतंकवादी गतिविधियों का पता लगाने, संभावित खतरों को रोकने और आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करने की तैयारियों की जानकारी शामिल थी।

आतंकी खतरों की पहचान और रोकथाम पर विशेष जोर

सेना प्रमुख ने सुरक्षा बलों से आतंकवादी खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहने को कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद रोधी अभियानों में खुफिया जानकारी की भूमिका महत्वपूर्ण है और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने सुरक्षा बलों को उभरते खतरों की समय रहते पहचान करने, उनके अनुरूप अभियानगत रणनीति तैयार करने और आवश्यकता पड़ने पर तेजी तथा सटीकता के साथ जवाब देने की क्षमता बनाए रखने का आह्वान किया।

खुफिया अभियानों को और बेहतर बनाने का आह्वान

जनरल सेठ ने खुफिया आधारित अभियानों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उनका संदेश था कि आतंकवाद रोधी अभियानों में केवल अभियान चलाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का प्रभावी विश्लेषण और उनका समयबद्ध इस्तेमाल भी जरूरी है।

उन्होंने सुरक्षा बलों को लगातार बदल रहे सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप अपनी तैयारियों को मजबूत बनाए रखने और संभावित खतरों की पहचान के लिए सतर्क रहने को कहा।

जवानों की पेशेवर क्षमता और प्रतिबद्धता की सराहना

दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने सभी रैंक के जवानों की पेशेवर क्षमता, प्रतिबद्धता और उच्च स्तर की अभियानगत तैयारियों की सराहना की।

उन्होंने आतंकवाद रोधी अभियानों में तैनात जवानों से अपनी पेशेवर दक्षता बनाए रखने तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लगातार सतर्कता बरतने का आह्वान किया। उन्होंने उभरते खतरों के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए अभियानगत तैयारियों को निरंतर मजबूत रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर

सेना प्रमुख ने आतंकवाद रोधी अभियानों को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने सभी संबंधित हितधारकों के साथ निर्बाध समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की व्यापक समझ विकसित की जा सके और किसी भी संभावित खतरे के सामने संयुक्त एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो।

उनके अनुसार, सुरक्षा स्थिति को बेहतर ढंग से समझने और आतंकवाद रोधी समग्र प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और करीबी समन्वय आवश्यक है।

स्थानीय आबादी की सुरक्षा को भी बताया महत्वपूर्ण

आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी सेना प्रमुख ने जोर दिया। उन्होंने सुरक्षा बलों को सतर्क रहते हुए समन्वित और संतुलित प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने अभियानों पर निरंतर ध्यान बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सुरक्षा अभियानों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बनी रहे।

मध्य और उत्तर कश्मीर में बढ़ी अभियानगत गतिविधियां

सेना प्रमुख का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब मध्य और उत्तर कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों पर सुरक्षा बलों का ध्यान बढ़ा हुआ है। इन इलाकों में सुरक्षा बल संभावित आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ से जुड़े खतरों को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

कुपवाड़ा और बड़गाम जैसे जिले सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ खुफिया सूचनाओं के आधार पर अभियान चलाए जाते हैं।

यूसमर्ग के घने जंगलों में चलाया गया था अभियान

इस महीने की शुरुआत में बड़गाम जिले के यूसमर्ग के घने जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद रोधी अभियान चलाया था। इस अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।

सेना के अनुसार, मारे गए आतंकवादी की पहचान पाकिस्तानी नागरिक यासिर के रूप में हुई थी। जंगल क्षेत्र में चलाया गया यह अभियान सुरक्षा बलों की खुफिया जानकारी के आधार पर की जाने वाली कार्रवाई के महत्व को भी रेखांकित करता है।

बदलते खतरे के अनुरूप रणनीति मजबूत करने पर जोर

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों के सामने लगातार बदलते खतरे एक प्रमुख चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में सेना प्रमुख का जोर खुफिया सूचनाओं को मजबूत करने, संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर रहा।

उन्होंने सुरक्षा बलों से अभियानगत तैयारियों को लगातार उच्च स्तर पर बनाए रखने और परिस्थितियों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करने को कहा।

लगातार सतर्कता को बताया अभियान की अहम जरूरत

जनरल सेठ ने सुरक्षा बलों को लगातार सतर्क रहने का संदेश दिया। उन्होंने अभियानगत गतिविधियों पर निरंतर ध्यान बनाए रखने और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनका निर्देश विशेष रूप से ऐसे समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब उत्तर और मध्य कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बल आतंकवाद विरोधी अभियानों को लेकर लगातार सक्रिय हैं।

समन्वित और संतुलित प्रतिक्रिया की आवश्यकता

सेना प्रमुख ने सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित और संतुलित प्रतिक्रिया की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। इसमें सुरक्षा बलों की अभियानगत क्षमता, खुफिया तंत्र, स्थानीय स्तर पर जानकारी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण घटक माना गया।

उन्होंने स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद रोधी अभियान केवल एक एजेंसी के प्रयासों तक सीमित न रहकर सभी संबंधित हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल के साथ आगे बढ़ाए जाएं।

सुरक्षा स्थिति की बेहतर समझ विकसित करने पर बल

दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की बेहतर समझ विकसित करने को भी प्राथमिकता बताया। इसके लिए जमीनी स्तर से मिलने वाली सूचनाओं, खुफिया इनपुट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

सुरक्षा बलों के लिए चुनौती यह है कि संभावित खतरों की पहचान समय रहते हो और उनके आधार पर अभियानगत प्रतिक्रिया को सटीक बनाया जा सके।

अभियानगत तैयारियों की समीक्षा का सिलसिला जारी

सेना प्रमुख का अग्रिम इलाकों का दौरा सुरक्षा बलों की जमीनी तैयारियों की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। ऐसे दौरों के दौरान वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को स्थानीय सुरक्षा स्थिति, तैनाती, अभियानगत जरूरतों और सामने आ रही चुनौतियों की प्रत्यक्ष जानकारी मिलती है।

कुपवाड़ा और बड़गाम जैसे इलाकों का दौरा इस बात को भी रेखांकित करता है कि उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों को लेकर सुरक्षा बल लगातार निगरानी और तैयारी बनाए हुए हैं।

जवानों से उच्च स्तरीय दक्षता बनाए रखने की अपील

जनरल सेठ ने सुरक्षा बलों के जवानों से उनकी पेशेवर क्षमता और प्रतिबद्धता को लगातार बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने उभरती परिस्थितियों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने और अभियानगत तैयारियों को मजबूत रखने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने जवानों के समर्पण और तैयारियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी सतर्कता और पेशेवर दक्षता के साथ जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

आतंकवाद रोधी रणनीति में खुफिया तंत्र की भूमिका

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में खुफिया जानकारी की भूमिका महत्वपूर्ण है। संभावित आतंकवादी गतिविधियों की पहचान, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और अभियानों के लिए आवश्यक सूचनाएं जुटाना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसी संदर्भ में सेना प्रमुख ने खुफिया आधारित अभियानों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई को अधिक केंद्रित और प्रभावी बनाना है।

स्थानीय सुरक्षा और अभियानगत कार्रवाई के बीच संतुलन

आतंकवाद रोधी अभियानों में सुरक्षा बलों के सामने एक प्रमुख आवश्यकता अभियानगत प्रभावशीलता के साथ स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। सेना प्रमुख ने अपने दौरे के दौरान इसी संतुलन को बनाए रखने पर जोर दिया।

उन्होंने सुरक्षा बलों से समन्वित प्रतिक्रिया के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अभियानगत गतिविधियों के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने का आह्वान किया।

सुरक्षा बलों को चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश

दौरे के दौरान सेना प्रमुख का संदेश व्यापक रूप से लगातार सतर्कता, बेहतर खुफिया तंत्र, उच्च अभियानगत तैयारी और एजेंसियों के बीच समन्वय पर केंद्रित रहा।

उन्होंने सुरक्षा बलों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि वे उभरते खतरों का तेजी से आकलन कर सकें और जरूरत पड़ने पर सटीक एवं प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकें।

आगे भी जारी रहेंगी आतंकवाद रोधी गतिविधियां

उत्तर और मध्य कश्मीर में सुरक्षा बलों की मौजूदा गतिविधियों के बीच सेना प्रमुख का दौरा अभियानगत तैयारियों की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। सुरक्षा बलों का ध्यान आतंकवादी खतरों की पहचान, उनकी रोकथाम और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर केंद्रित है।

यूसमर्ग में हालिया अभियान और सेना प्रमुख द्वारा खुफिया आधारित अभियानों को मजबूत करने पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी रणनीति में खुफिया सूचनाओं, त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय को लगातार महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है।

सेना प्रमुख के निर्देशों का व्यापक फोकस

पूरे दौरे के दौरान सेना प्रमुख के संदेश के प्रमुख बिंदु रहे—लगातार सतर्कता, खुफिया आधारित अभियानों को मजबूत करना, उभरते खतरों पर तेजी से प्रतिक्रिया, अभियानगत तैयारियों को उच्च स्तर पर बनाए रखना, सुरक्षा एजेंसियों के बीच करीबी समन्वय और स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

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