

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मदरसों को लेकर राज्य सरकार की कार्रवाई अब दूसरे चरण में प्रवेश करने जा रही है। अल्पसंख्यक एवं मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू के अनुसार, दुर्गापूजा के बाद नवंबर-दिसंबर में दोबारा सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के नतीजे यह तय करेंगे कि किन संस्थानों को आगे संचालन की अनुमति मिलेगी और किन पर कार्रवाई होगी। ऐसे में पूजा के बाद मदरसों पर सरकारी शिकंजा और कसने के संकेत हैं।
मंत्री के अनुसार राज्य में करीब 4,528 मदरसे हैं। इनमें 2,132 सरकारी अनुदानप्राप्त, जबकि 2,396 अनुदानरहित मदरसे हैं। पहले चरण की जांच में 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है। इनमें खैराती मदरसे भी शामिल हैं। सरकार का मुख्य आधार इन संस्थानों में आवश्यक बुनियादी ढांचे और निर्धारित मानकों का अभाव बताया जा रहा है। इसके अलावा 100 मदरसों को शो-कॉज नोटिस दिया गया है और उनके जवाबों की समीक्षा चल रही है।
दरअसल, सरकार की मौजूदा कार्रवाई केवल संस्थानों की मान्यता या अनुदान तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि मदरसों के संचालन, बुनियादी ढांचे और नियामकीय अनुपालन को जांच के केंद्र में रखा गया है। यही वजह है कि पहले चरण की कार्रवाई के बाद भी प्रक्रिया रोकने के बजाय सरकार ने दूसरा सर्वे कराने का फैसला किया है।
दूसरे चरण की रिपोर्ट सामने आने के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। खासकर अनुदानरहित और खैराती मदरसों की स्थिति की विस्तृत जांच से कई नए संस्थान सरकार की निगरानी के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय सर्वे और संबंधित संस्थानों के जवाबों की समीक्षा के बाद ही होगा।