निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बारासात : फाइलों के ढेर, अपनी धुन में काम करते पुलिसकर्मी और घर जाने की तैयारी में जुटे स्टाफ—मंगलवार की देर रात अशोकनगर थाने का माहौल कुछ ऐसा ही था। लेकिन अचानक थाने के गेट पर पुलिस अधीक्षक (SP) की गाड़ी आकर रुकी, तो वहां मौजूद ड्यूटी ऑफिसर से लेकर संतरी तक के होश उड़ गए। कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसी (साउथ) और वर्तमान में बारासात पुलिस जिले के एसपी प्रियव्रत राय को इतनी रात गए अपने बीच पाकर पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में सैल्यूट ठोका और पूछा, "सर, क्या कोई इमरजेंसी है?"
एसपी प्रियव्रत राय का यह दौरा पूरी तरह से औचक (Surprise) था। थाने में कदम रखते ही उन्होंने सबसे पहले 'मालखाना' (जब्त किए गए सामानों का स्टोर) का रुख किया। उन्होंने बारीकी से जांच की कि वहां रखे सामानों का सही रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा है या नहीं। इसके बाद उन्होंने विभिन्न लंबित मामलों की जांच (Investigation) की प्रगति पर सवाल-जवाब किए। अक्सर पुलिस पर एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच में ढिलाई बरतने के आरोप लगते हैं, जिसे लेकर एसपी ने कड़ा रुख अपनाया। आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए।
दौरे के बाद एसपी प्रियव्रत राय ने स्पष्ट किया कि जिले के सभी थानों के बुनियादी ढांचे और कामकाज के तरीकों की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता और पुलिस के बीच संबंध बेहतर हों। अगर कोई व्यक्ति शिकायत लेकर थाने आता है, तो उसे पूरा सहयोग मिलना चाहिए। पुलिस का व्यवहार मित्रवत और मददगार होना अनिवार्य है।"
अशोकनगर ही नहीं, एसपी पिछले कुछ दिनों में रात के समय जिले के कई अन्य थानों का भी इसी तरह दौरा कर चुके हैं। इस 'सरप्राइज विजिट' संस्कृति से उन पुलिसकर्मियों में हड़कंप है जो ड्यूटी के दौरान ढिलाई बरतते हैं। गौरतलब है कि नई जिम्मेदारी संभालने से पहले प्रियव्रत राय का नाम कुछ विवादों में भी आया था, लेकिन बारासत के एसपी के रूप में उनकी इस सक्रियता की अब चर्चा हो रही है। अब जिले के अन्य थानों के अधिकारी भी इस बात को लेकर सतर्क हैं कि अगली बारी किस थाने की होगी।