बंगाल–ओडिशा की नौकरशाही में ठन सकती है रार

पहली महिला मुख्य सचिवों से बदला प्रशासनिक समीकरण
पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत से कार्यभार ग्रहण करते मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती
पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत से कार्यभार ग्रहण करते मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती
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कोलकाता : नये साल की पूर्वसंध्या पर ओडिशा और पश्चिम बंगाल में पहली बार महिला मुख्य सचिवों की नियुक्ति महज एक ऐतिहासिक संयोग नहीं, बल्कि दोनों पड़ोसी राज्यों की नौकरशाही के बीच उभरते टकराव को नयी दिशा देने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब ओडिशा में कार्यरत बंगाली प्रवासी श्रमिकों के कथित उत्पीड़न के मामलों ने अंतरराज्यीय संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है।

ओडिशा में 1991 बैच की आईएएस अधिकारी अनु गर्ग ने 1990 बैच के मनोज आहूजा का स्थान लिया, जो 1 जुलाई 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक मुख्य सचिव रहे। गर्ग राज्य की 47वीं मुख्य सचिव हैं और ओडिशा के गठन के बाद इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। इससे पहले वे विकास आयुक्त-सह-अपर मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थीं।

वहीं पश्चिम बंगाल में 1994 बैच की आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती की मुख्य सचिव के रूप में नियुक्ति ने प्रशासनिक नेतृत्व को नये सिरे से परिभाषित किया है। यह बदलाव उस समय हुआ है, जब बंगाल सरकार ने ओडिशा में बंगाली श्रमिकों की गिरफ्तारी, पूछताछ और कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे को भाषा और पहचान से जुड़े भेदभाव के रूप में जोर-शोर से उठाया है।

इसके जवाब में ओडिशा प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा आंतरिक मामला बताया है। इस पृष्ठभूमि में महिला नेतृत्व का उदय प्रशासनिक टकराव को अधिक संस्थागत और रणनीतिक बनाने वाला माना जा रहा है। नंदिनी चक्रवर्ती के सामने प्रवासी बंगालियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की चुनौती है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले। वहीं अनु गर्ग के लिए कानून-व्यवस्था, विकास प्राथमिकताओं और अंतर-राज्यीय संतुलन को साधना अहम परीक्षा होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव अब केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सचिवालयों और प्रशासनिक तंत्र के स्तर पर भी इसका असर दिखेगा। पहली महिला मुख्य सचिवों की नियुक्ति से संवाद और संवेदनशील समाधान की उम्मीद जगी है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि बंगाल–ओडिशा संबंध अब नौकरशाही के एक नये और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

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