'भारत रत्न' लता मंगेशकर पर समर्पित विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ

सुरों की सम्राज्ञी' को अनोखी, भावभीनी श्रद्धांजलि
प्रदर्शनी का उद्घाटन
प्रदर्शनी का उद्घाटन
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कोलकाता: महानगर में जब लता मंगेशकर की स्मृतियों, तस्वीरों, रिकॉर्ड और दुर्लभ दस्तावेज़ों का समृद्ध संसार एक छत के नीचे सजा, तो यह सिर्फ एक प्रदर्शनी का उद्घाटन नहीं था—यह उन सुरों के सम्राज्य को समर्पित एक जीवंत उत्सव था, जिन्होंने भारत की कई पीढ़ियों को स्पर्श किया। प्रभा खेतान फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित 'भारत रत्न लता मंगेशकर' प्रदर्शनी को संगीत शोधकर्ता स्नेहासिस चटर्जी ने संजोया है, जिन्होंने 'लता गीतकोश' के 15 खंड तैयार किए हैं और लिम्का बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स में सम्मानित भी हो चुके हैं।

जमिनी रॉय गैलरी (आईसीसीआर) में लगी इस प्रदर्शनी में 'स्वर कोकिला' के छह दशक लंबे सफ़र को तस्वीरों, एल्बमों, पोस्टरों और दस्तावेज़ों के माध्यम से प्रस्तुति मिली। लता जी के शुरुआती संघर्ष से लेकर विश्वस्तरीय पहचान तक का पूरा सफर रचनात्मक शैली में उकेरा गया है। आगंतुकों को उनकी निजी और पेशेवर यात्रा की दुर्लभ झलकियाँ देखने को मिलीं—रिकॉर्डिंग स्टूडियो के पल, पुरस्कार ग्रहण करते क्षण, और परिवार तथा सहकर्मियों संग बीते कुछ स्मरणीय दृश्य।

उद्घाटन समारोह में बंगाल के संगीत, साहित्य और कला जगत की कई दिग्गज हस्तियाँ मौजूद रहीं—श्रीकांत आचार्य, जॉय सरकार, प्रो. पबित्र सरकार सहित साहित्य, फिल्म और संगीत शोध के कई जाने-माने नाम। कार्यक्रम का संचालन देबाशीष बसु ने किया। श्रीरामपुर निवासी और लता मंगेशकर पर शोध करने वाले एकमात्र संग्रहकर्ता स्नेहाशीष ने सन्मार्ग को बताया, 'जब मैंने पहली बार बचपन में लता जी का 'ओ बबूल प्यारे' सुना, तो मुझे उनकी आवाज से प्यार हो गया। बाद में मैंने महान संग्रहकर्ता सूरजलाल मुखर्जी के मार्गदर्शन में अपना संग्रहकर्ता जीवन शुरू किया और चार दशकों से अधिक समय तक लता जी पर काम किया।'

स्नेहाशीष ने कहा, 'यह मेरा सौभाग्य है कि मैं व्यक्तिगत रूप से लता जी से एक-दो बार मिला और उन्होंने मेरे काम के लिए मुझे आशीर्वाद दिया।' उनके अनुसार यह प्रदर्शनी 'सुरों की मलिका' लता मंगेशकर को भावभीनी श्रद्धांजलि है। लता मंगेशकर की आवाज़ ने भारतीय संगीत को जो पहचान दी, इस प्रदर्शनी ने उसी अमर धरोहर को संजोकर एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक दस्तावेज़ का रूप दे दिया है—जहाँ हर दीवार, हर तस्वीर और हर स्मृति, सुरों की उस अनुपम साधना की कहानी कहती है जिसने भारत को हमेशा के लिए बदल दिया।

यह प्रदर्शनी 1 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन शाम 3 से 8 बजे तक खुलेगी।

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