

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित हस्ताक्षर विवाद को लेकर सियासत लगातार गरमा रही है। इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता तथा वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति के हस्ताक्षर करना पूरी तरह गलत है और वह किसी भी परिस्थिति में ऐसे कार्य का समर्थन नहीं करते।
शुक्रवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए शोभनदेव ने कहा, “दूसरे के हस्ताक्षर करना अन्याय है। मैं किसी भी अन्याय का समर्थन नहीं करता, चाहे मैं विपक्ष का नेता रहूं या नहीं।” उनके इस बयान को तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते दबाव और विवाद को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, विधानसभा में विपक्ष के नेता के प्रस्ताव पत्र पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए जाने के आरोप के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मामले की जांच फिलहाल सीआईडी कर रही है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप साबित होता है, तो संबंधित विधायक की सदस्यता भी खतरे में पड़ सकती है।
जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8A के तहत ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, शोभनदेव ने विपक्ष के नेता के मुद्दे को लेकर सरकार पर “अति सक्रियता” दिखाए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा पाने के लिए कम से कम 30 विधायकों की आवश्यकता होती है और इस नियम को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
विवाद के बीच शुक्रवार दोपहर शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कई विधायकों के साथ बैठक भी की। इस बैठक में नयना बंद्योपाध्याय, कुणाल घोष, बहारुल इस्लाम सहित विवाद में नाम जुड़े कई विधायक मौजूद थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विमान बंद्योपाध्याय भी बैठक में शामिल हुए। हालांकि बैठक के बाद किसी नेता ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को सौंपी जाएगी।