

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता के पूर्व मेयर शोभन चटर्जी और उनकी दोस्त वैशाखी बनर्जी सोमवार को दोपहर अचानक विकास भवन पहुंचे। यहां उन्होंने राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय से करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बैठक की। बाद में स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन भी बैठक में शामिल हुए। बैठक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं, हालांकि दोनों मंत्रियों और शोभन-वैशाखी ने बैठक के विस्तृत विषय पर टिप्पणी करने से परहेज किया।
बैठक के बाद वैशाखी ने 'सन्मार्ग' से बातचीत में कहा कि उनकी नियुक्ति से जुड़ा विवाद, जो पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था, वर्तमान सरकार के समय भी फिर सामने आया है। उनके अनुसार हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग से उन्हें एक पत्र मिला है, जिसकी भाषा और आशय पहले जारी विवादित पत्र से काफी मिलता-जुलता है। उन्होंने इस पत्र का विरोध करते हुए मंत्री को सभी संबंधित दस्तावेज सौंपे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पुराना नियुक्ति विवाद फिर उभरा, हलचल तेज
उल्लेखनीय है कि वैशाखी पहले बेनियापुकुर स्थित मिल्ली अल-अमीन कॉलेज में सहायक प्राध्यापक, प्रभारी प्राचार्य तथा डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) के पद पर कार्यरत थीं। वर्ष 2019 में उनके इस्तीफे और बाद में 2020 में राममोहन राय कॉलेज में तबादले को लेकर प्रशासनिक और कानूनी विवाद खड़ा हुआ था।
पिछले वर्ष उच्च शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर उनके 2019 से सेवा मुक्त माने जाने की बात कही थी, जिससे उनके वेतन, सेवा अवधि और प्रशासनिक निर्णयों की वैधता पर सवाल उठे। बाद में विभाग ने उस आदेश को स्थगित कर कानूनी राय लेने की बात कही थी। वैशाखी का कहना है कि अब उसी प्रकार का नया पत्र फिर मिलने से पुराना विवाद दोबारा खड़ा हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं की जांच कर जल्द उचित निर्णय लेगी।