खामेनेई के बाद सत्ता पर बेटे मोजतबा: ईरान में वंशवाद या नई रणनीति?

पिता की विरासत, शहादत की राजनीति और सुरक्षा तंत्र के सहारे मजबूत हो रही पकड़
खामेनेई के बाद सत्ता पर बेटे मोजतबा: ईरान में वंशवाद या नई रणनीति?
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ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक में सत्ता परिवर्तन के साथ एक नई बहस शुरू हो गई है। दिवंगत सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे Mojtaba Khamenei के शीर्ष पद पर आने को लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। कई विश्लेषकों के मुताबिक यह बदलाव ईरान की क्रांति के उस मूल सिद्धांत को चुनौती देता है, जिसमें वंशवाद को नकारते हुए धार्मिक नेतृत्व की व्यवस्था बनाई गई थी।

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था Velayat-e Faqih के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें सर्वोच्च धार्मिक नेता के पास अंतिम अधिकार होता है। लेकिन अब सत्ता में बेटे के आने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान उसी वंशवादी व्यवस्था की ओर लौट रहा है, जिसके खिलाफ 1979 की इस्लामी क्रांति हुई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के लिए “शहादत की राजनीति” भी एक बड़ा सहारा बन सकती है। शिया परंपरा में Imam Hussein की करबला में शहादत की कहानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी प्रतीकवाद के जरिए मोजतबा को “शहीद नेता के बेटे” के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे जनता में समर्थन जुटाने की कोशिश होगी।

मोजतबा खामेनेई ने ईरान की सत्ता संरचना में तीन प्रमुख नेटवर्क बनाए हैं—धार्मिक प्रतिष्ठान, सुरक्षा बल और सुप्रीम लीडर के दफ्तर से जुड़े राजनीतिक समूह। सुरक्षा तंत्र में उनकी करीबी मानी जाती है Mohammad Reza Naqdi और पूर्व खुफिया प्रमुख Hossein Taeb से, जो Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़े रहे हैं।

ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक इकाई Basij Resistance Force भी सत्ता की मजबूती में अहम भूमिका निभाती है। 1979 में Ruhollah Khomeini द्वारा स्थापित यह बल आंतरिक सुरक्षा, विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने और सामाजिक नियमों को लागू कराने के लिए जाना जाता है।

विश्लेषकों के अनुसार मोजतबा खामेनेई आमतौर पर सार्वजनिक मंचों से दूर रहते हैं और पर्दे के पीछे से रणनीति बनाते हैं। लेकिन आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और क्षेत्रीय तनाव के बीच उन्हें अब कूटनीति और शक्ति संतुलन दोनों की कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है।

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