

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
नयी दिल्ली/कोलकाता : नागरिकता कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी दायर की गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के डिविजन बेंच ने इस बाबत दायर एक पीआईएल को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ एसएलपी दायर की गई है। चीफ जस्टिस सुर्यकांत के डिविजन बेंच में बुधवार को इसे मेंशन किया गया तो उन्होंने नौ दिसंबर को इसकी सुनवायी की जाने का आदेश दिया।
एडवोकेट प्रभात श्रीवास्तव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सीएए के तहत नागरिकता के लिए किए गए आवेदन की जो रसीद मिली है उसे ही मान्य दस्तावेज मान लेने की अपील करते हुए हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की गई थी। सीनियर एडवोकेट करुणा नन्दी ने सोमवार को इसे मेंशन करते हुए कहा कि वे विशेष कर के बांग्लादेश से धर्म के आधार पर विस्थापित किए गए हिंदू, बौद्ध और क्रिश्चियन समुदाय की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग 2014 से पहले भारत में आ गए थे पर उन्हें अभी तक सीएए (सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट) के तहत सुरक्षा नहीं मिल पायी है। चीफ जस्टिस सुर्यकांत ने कहा कि हम सिर्फ इस आधार पर कोई भेदभाव नहीं कर सकते हैं कि उनमें से कोई जैन है या कोई बौद्ध है। सीएए के तहत हमें प्रत्येक मामले पर विचार करना पड़ेगा। एडवोकेट श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2019 सीएए को पास किया था। इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से सिर्फ धर्म के आधार पर विस्थापित किए जाने वाले लोगों को नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने इसके लिए आवेदन भी किया है, पर इसका निपटारा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के कई हजार आवेदक हैं और उनके पास मतदान करने का अधिकार भी है। इसके बावजूद उन्हें नागरिकता नहीं दी जा रही है।