एसआईआर की 'दहशत' ने ली एक और जान !

नदिया में वृद्ध की मृत्यु, वैध दस्तावेज होने के बावजूद 2002 की सूची में नाम न होने का सता रहा था डर
SIR's 'terror' took another life!
मृतक श्यामल साहा का फाइल फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

नदिया : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद 'दहशत' के कारण कथित तौर पर एक और व्यक्ति की मृत्यु होने का गंभीर आरोप सामने आया है। यह हृदय विदारक घटना नदिया जिले के काली नारायणपुर पहाड़पुर इलाके की है, जहाँ श्यामल कुमार साहा (70) नामक एक वृद्ध की मृत्यु हो गई। परिवार ने उनकी मौत का सीधा कारण एसआईआर के कारण उत्पन्न हुए अत्यधिक मानसिक तनाव और डर को बताया है।

2002 की मतदाता सूची ने बढ़ाई चिंता

मृतक के परिवार का आरोप है कि श्यामल कुमार साहा का नाम 2002 की मतदाता सूची में शामिल नहीं था। एसआईआर प्रक्रिया की घोषणा होने के बाद से ही वह बहुत अधिक चिंतित और भयभीत रहने लगे थे। परिवार ने बताया कि इस चिंता ने उन्हें इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने लगभग खाना-पीना छोड़ दिया था। अंततः, सोमवार की सुबह डर और अत्यधिक तनाव के कारण श्यामल साहा का निधन हो गया।

परिवार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि भले ही उनका मूल रूप से बांग्लादेश से जुड़ाव रहा हो, लेकिन वे 30 साल से अधिक समय से भारत में स्थायी रूप से निवास कर रहे थे। उनके पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और यहाँ तक कि घर की रजिस्ट्री जैसे सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज़ मौजूद थे, जो उनकी नागरिकता और निवास को प्रमाणित करते हैं। बावजूद इसके, केवल 2002 की पुरानी सूची में नाम न होने की वजह से, उन्हें यह डर सता रहा था कि उनकी नागरिकता पर सवाल उठ सकते हैं और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

श्यामला कुमार साहा अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे, जो सर्दियों के कपड़े बेचकर गुज़ारा करते थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे (जो बाहर राजमिस्त्री का काम करते हैं) और दो बहुएं हैं। परिवार के एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति की अचानक मौत ने उन्हें गहरे सदमे और आर्थिक संकट में डाल दिया है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेतृत्व और पंचायत सदस्य तुरंत मौके पर पहुँचे और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं, पुलिस ने इस मामले में अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज कर लिया है और श्यामला कुमार साहा की मृत्यु के सही कारणों की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। यह घटना एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राज्य में व्याप्त मानवीय संकट और दहशत को फिर से उजागर करती है।

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