

देरी की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ होगी कार्रवाई
केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2026 के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि SIR से जुड़ी किसी भी सुनवाई या सरकारी कार्य के दौरान यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। देरी की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि यह निर्देश भारत निर्वाचन आयोग के 21 जनवरी 2026 के मेमो और सुप्रीम कोर्ट के WP(C) No. 1089/2025 में दिए गए आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है। यह आदेश पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR-2026 से संबंधित है।
हिंसा या धमकी पर तुरंत FIR अनिवार्य
निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि यदि SIR से जुड़ी सुनवाई स्थलों या किसी सरकारी कार्यालय में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या किसी अधिकारी-कर्मचारी को धमकी मिलती है अथवा उस पर हमला होता है, तो जिला निर्वाचन अधिकारी को तुरंत स्थानीय थाने में शिकायत या एफआईआर दर्ज करानी होगी। इसकी प्रति पुलिस अधीक्षक और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भी भेजनी होगी।
हालात बिगड़े तो सुनवाई स्थगित
यदि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं लगातार जारी रहती हैं, तो संबंधित मामलों की सुनवाई को साइन डाई (अनिश्चित काल के लिए) स्थगित किया जाएगा। ऐसी सुनवाई दोबारा तभी शुरू होगी जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल से इसकी अनुमति मिलेगी।
देरी पर होगी सख्त कार्रवाई
पत्र में चेतावनी दी गई है कि एफआईआर दर्ज कराने में किसी भी तरह की देरी को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाएगा।
तत्काल अनुपालन का निर्देश
चुनाव आयोग ने सभी जिलों को इन निर्देशों का तत्काल और सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि SIR-2026 की प्रक्रिया निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में पूरी की जा सके।