

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
पानीहाटी : पश्चिम बंगाल में 'एसआईआर' (SIR) प्रक्रिया को लेकर आम जनता के बीच फैला डर अब जानलेवा साबित होने लगा है। उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी घोला बिलकांदा-1 नंबर पंचायत के तालबांदा उत्तरपाड़ा इलाके में एक 80 वर्षीय वृद्धा, अलोका विश्वास, सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद सदमे में आ गईं। दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वे वर्तमान में कोमा में चली गई हैं।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
स्थानीय सूत्रों और परिजनों के अनुसार, अलोका विश्वास को दो दिन पहले प्रशासन की ओर से SIR के तहत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का नोटिस मिला था। जैसे ही उन्होंने नोटिस देखा, वे घबरा गईं और घर के भीतर ही अचानक गिर पड़ीं। उन्हें तत्काल कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें गंभीर 'हार्ट अटैक' (हृदयघात) आया है। इस समय उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और वे वेंटिलेटर/कोमा में मौत से जूझ रही हैं।
पहले से ही सता रहा था डर
अलोका देवी की बहू ने बताया कि जब से इलाके में SIR प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच की चर्चा शुरू हुई थी, तभी से उनकी सास काफी तनाव में रहने लगी थीं। वे अक्सर अपनी बहू से पूछती थीं कि क्या उन्हें अपनी ही जमीन या देश से बेदखल कर दिया जाएगा? बहू ने रोते हुए कहा, "माँ पहले से ही डरी हुई थीं, और जैसे ही सुनवाई का कागज हाथ में आया, उनका शरीर यह दबाव झेल नहीं पाया।"
पंचायत उप-प्रधान और ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना के बाद तालबांदा इलाके के निवासियों में भारी दहशत और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा व्याप्त है। स्थानीय पंचायत के उप-प्रधान ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि अलोका विश्वास की इस हालत के पीछे सीधे तौर पर वह नोटिस जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, "नोटिस मिलने के बाद ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा। बुजुर्ग लोग इन प्रक्रियाओं के नाम से ही कांप रहे हैं।"
इलाके में फैला आतंक
अलोका देवी की स्थिति ने पूरे गांव के लोगों को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को बुजुर्गों और सामान्य नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर नागरिकता और पहचान से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के मानवीय पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग अलोका देवी के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।