निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बशीरहाट: पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नागरिकता और मतदान के अधिकार को लेकर व्याप्त 'आतंक' के बीच उत्तर 24 परगना के बादुड़िया में एक प्रौढ़ा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान रीना रानी कुंडू (50) के रूप में हुई है। आरोप है कि वोटर लिस्ट में बेटों का नाम गायब होने और खुद का नाम 'विचाराधीन' (Under Review) सूची में होने के सदमे को वह बर्दाश्त नहीं कर सकीं।
घटना बादुड़िया के पश्चिम चंडीपुर गांव की है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जारी हुई सूची में रीना रानी का नाम 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया था, जबकि उनके दो बेटों, शुभदीप और सौमेन का नाम पूरी तरह से काट दिया गया था। वर्षों से यहां रहने और तमाम वैध दस्तावेज होने के बावजूद नाम कटने से परिवार गहरे तनाव में था। सोमवार दोपहर जब दोनों बेटे अपने दस्तावेज लेकर प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय गए थे, तभी पीछे से रीना रानी ने घर के कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी।
बेटों को मोबाइल पर जैसे ही मां की खबर मिली, वे बदहवास होकर घर पहुंचे। उन्हें स्थानीय बादुड़िया ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार बंगाल के नागरिकों के मतदान अधिकार के लिए संघर्ष कर रही हैं, ऐसे में इस मौत ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि मतदाता सूची को लेकर अनिश्चितता ही इस दुखद घटना की मुख्य वजह है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।