

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के दौरान 82 वर्षीय लेफ्ट नेता और सुंदरबन के पूर्व विकास मंत्री कांति गंगोपाध्याय के घर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पहुंचने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार 85 साल से अधिक उम्र या गंभीर रूप से बीमार मतदाताओं के घर पर ही सुनवाई होनी है। ऐसे में 82 साल की उम्र में घर पर सुनवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह विशेष सुविधा थी या तकनीकी मजबूरी।
कांति के घर क्यों पहुंचीं BLO
दक्षिण 24 परगना के रायदिघी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता और CPM नेता कांति गंगोपाध्याय को SIR सुनवाई की नोटिस भेजी गयी थी। उनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में दर्ज है, लेकिन SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं पाया गया। इसी कारण उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन BDO कार्यालय जाने के बजाय BLO कविता दासगुप्ता खुद उनके घर पहुंचीं।
गंगोपाध्याय ने क्या कहा
पूर्व मंत्री ने साफ कहा कि उन्होंने किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं मांगी थी। वे स्वयं सुनवाई स्थल पर जाने को तैयार थे। उनके मुताबिक SIR देशहित की प्रक्रिया है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह दस्तावेज देकर सहयोग करे। उन्होंने यह भी कहा कि बीमार या असहाय लोगों के घर BLO का जाना कोई असामान्य बात नहीं होनी चाहिए।
मैपिंग में आयी तकनीकी दिक्कत
BLO कविता दासगुप्ता ने बताया कि बूथ नंबर 221 के 103 मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है और कांति गंगोपाध्याय उनमें से एक हैं। उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज दिए, लेकिन सिस्टम में फॉर्म डाउनलोड और डेटा मैपिंग में तकनीकी समस्या आई। इसी वजह से उनसे लिखित पत्र लिया गया और फोटो खींची गई।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
कांति गंगोपाध्याय दो बार सुंदरबन डेवलपमेंट मिनिस्टर रह चुके हैं और 2001 से 2011 तक CPM विधायक थे। इसी पृष्ठभूमि के कारण विपक्ष और स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या उम्र से कम होने के बावजूद उन्हें पूर्व मंत्री होने के कारण घर पर सुनवाई की सुविधा मिली।
चुनाव आयोग को पत्र और आगे की कार्रवाई
पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट और पूर्व विधायक पहचान पत्र जमा करने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं आता, तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।