

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माइक्रो-ऑब्जर्वर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AERO) द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जो दस्तावेज भारत निर्वाचन आयोग के नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं पाए जा रहे हैं, उन पर आपत्ति दर्ज की जा रही है।
निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कुल 1.5 करोड़ दस्तावेजों में से लगभग एक करोड़ की जांच हो चुकी है। इनमें से 10 लाख से अधिक मामलों में नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप न होने पर आपत्ति दर्ज की गई है। अब करीब 50 लाख दस्तावेजों की जांच बाकी है, जिनमें से 35 लाख का सत्यापन जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) द्वारा पहले ही किया जा चुका है।
राज्य में इस प्रक्रिया के लिए 8,000 से अधिक माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, दस्तावेजों की जांच 21 फरवरी तक पूरी करनी है।
इस बीच अतिरिक्त 8,505 कर्मियों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच गतिरोध जारी है। इन कर्मियों को जांच और सुनवाई की निगरानी के लिए तैनात किया जाना था।
रविवार को कई BLO ने बताया कि जांच के बाद कई मतदाताओं के फॉर्म और दस्तावेज वापस भेजे जा रहे हैं। हावड़ा के एक BLO के अनुसार, 26 मतदाताओं के दस्तावेजों को अपूर्ण मानते हुए दोबारा निर्धारित कागजात अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
वहीं टॉलीगंज के BLO अरूप मंडल ने कहा कि आपत्ति होने पर मतदाताओं से नए सिरे से दस्तावेज लेकर फिर अपलोड करना होगा। सुनवाई समाप्त हो चुकी है, लेकिन कई स्थानों पर अब भी दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया जारी है।