SIR : ब्रेन स्ट्रोक से बुजुर्ग महिला की मौत

परिवार ने SIR को बताया कारण
SIR: An elderly woman died from a brain stroke.
सांकेतिक फोटो REP
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बशीरहाट: उत्तर 24 परगना जिले के बादुरिया थाना अंतर्गत बादुरियापुर इलाके में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ 75 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला, अनिता विश्वास की ब्रेन स्ट्रोक के कारण मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना ने न केवल परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिजनों ने सीधे तौर पर प्रशासन की 'SIR' (स्पेशल इंक्वायरी रिपोर्ट) प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उपजी अनिश्चितता को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

क्या है पूरा मामला?

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, अनिता विश्वास का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं था। वर्तमान में चल रहे मतदाता सूची संशोधन और सत्यापन अभियान के तहत, उनके नागरिकता दस्तावेजों और पहचान की पुष्टि के लिए प्रशासन द्वारा जांच की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, बीते 5 जनवरी को उन्हें 'SIR' सुनवाई (Hearing) के लिए बुलाया गया था।

परिवार का दावा है कि 75 वर्ष की आयु में इस तरह की कानूनी और प्रशासनिक पूछताछ का सामना करना अनिता देवी के लिए मानसिक रूप से काफी कष्टकारी था। सुनवाई के बाद से ही वह गहरे तनाव में डूबी हुई थीं। उन्हें रह-रह कर यह डर सता रहा था कि कहीं अंतिम मतदाता सूची से उनका नाम न काट दिया जाए और वह अपनी पहचान और मतदान के अधिकार से वंचित न हो जाएं।

मानसिक तनाव और दुखद अंत

अनिता विश्वास के परिजनों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से वह इसी चिंता में डूबी रहती थीं कि क्या वह इस देश की वैध नागरिक मानी जाएंगी या नहीं। एक उम्रदराज व्यक्ति के लिए अपनी जड़ों और पहचान को साबित करने का दबाव असहनीय हो गया। इसी मानसिक खींचतान और भारी तनाव के बीच अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उन्हें गंभीर 'ब्रेन स्ट्रोक' आया था। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आक्रोश

मृतका के परिवार के सदस्यों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि एक वृद्ध महिला, जिसने अपना पूरा जीवन इसी मिट्टी पर बिताया, उसे अंतिम समय में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ी। परिजनों का सवाल है कि क्या प्रशासन को बुजुर्गों के लिए इन प्रक्रियाओं को सरल और तनावमुक्त नहीं बनाना चाहिए?

इस घटना के बाद बादुरियापुर इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की कड़ाई के बीच अक्सर गरीब और बुजुर्ग लोग मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने वोटर लिस्ट संशोधन अभियान की संवेदनशीलता पर बहस छेड़ दी है।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in