

70 कॉलेजों में 140 सरकारी प्रतिनिधियों का हुआ नामांकन
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के सहायता प्राप्त कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में सत्तारूढ़ दल के नेताओं और करीबियों की नियुक्तियों ने अकादमिक जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी सूचियों के अनुसार, गवर्नर ने विभिन्न जिलों के लगभग 70 कॉलेजों में 140 सरकारी प्रतिनिधियों को मनोनीत किया है। इससे पहले 22 अगस्त को जारी लिस्ट में 247 कॉलेजों के प्रेसिडेंट पदों पर बीजेपी से जुड़े जनप्रतिनिधियों, विधायकों, मंत्रियों और सांसदों को नियुक्त किया गया था। बाद में 171 और कॉलेजों की सूची में पार्टी के मंडल अध्यक्षों को भी तरजीह दी गई। सत्ता में आने के बाद राज्य की भाजपा सरकार ने शिक्षा के राजनीतीकरण को रोकने का मजबूत दावा किया था। हालाँकि, मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों की इन थोक नियुक्तियों से यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर अकादमिक क्षेत्र राजनीति के प्रभाव से कैसे पूरी तरह मुक्त रह पाएगा।
संघ से जुड़े चेहरों को मिलीं अहम जिम्मेदारियां
इस बार की नियुक्तियों में बीजेपी विधायक सजल घोष के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारियों को भी जगह मिली है। जादवपुर यूनिवर्सिटी के नॉन-टीचिंग स्टाफ और संघ समर्थित एम्प्लॉइज काउंसिल के सेक्रेटरी पलाश माजी को मटियाब्रुज कॉलेज और भास्कर सरदार को पचू के कॉलेज के लिए नॉमिनेट किया गया है। अन्य नॉमिनी में खिदिरपुर कॉलेज के लिए संघमित्रा भट्टाचार्य (BT रोड हाई स्कूल की हेडमिस्ट्रेस), हरिमोहन घोष कॉलेज के लिए सुभाष चंद्र मंडल और ठाकुरपुकुर विवेकानंद कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के लिए उदय बंद्योपाध्याय को मनोनीत किया गया है। इसके अलावा देशबंधु कॉलेज फॉर गर्ल्स के लिए बीजेपी प्रवक्ता ओफेलिया सिंह को भी चुना गया है। इन मनोनयनों पर प्रतिक्रिया देते हुए संघ से जुड़े प्रतिनिधियों का दावा है कि वे वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।