अशोकनगर में गूँजेगा 'सीड बम' का धमाका, यह जान लेगा नहीं बल्कि 'प्राण' देगा !

Seed Bombs in Ashoknagar: Youth's Unique Initiative for a Greener Bengal.
तैयार किया जा रहा 'सीड बम'REP
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

अशोकनगर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के माहौल में जहाँ 'बम' शब्द सुनते ही लोगों के मन में डर और हिंसा की तस्वीरें उभरने लगती हैं, वहीं उत्तर 24 परगना के अशोकनगर से एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। यहाँ मानिकतला इलाके में शिक्षित युवक-युवतियों का एक समूह 'बम' बनाने में जुटा है, लेकिन ये बम विनाश के लिए नहीं बल्कि पर्यावरण को पुनर्जीवित करने के लिए हैं। इन्हें 'सीड बम' (Seed Bomb) या 'बीज बम' नाम दिया गया है।

मानिकतला के एक छोटे से टिन की छत वाले कमरे में संगीत शिक्षक देवज्योति आचार्य और उनकी छात्राएं श्रेयासी, अर्पिता और पृथा जैसे युवा मिलकर इन विशेष गोलों को तैयार कर रहे हैं। बाहर से देखने पर भले ही यह किसी गुप्त ठिकाने जैसा लगे, लेकिन यहाँ बारूद की जगह मिट्टी और बीजों का इस्तेमाल हो रहा है।

बारूद नहीं, बीजों से भरी जा रही है 'मिट्टी की तोप'

संगीत शिक्षक देवज्योति आचार्य ने इस अनूठी पहल की शुरुआत की है। वे अपने छात्रों के साथ मिलकर मिट्टी के छोटे-छोटे गोले बना रहे हैं, जिनके भीतर फूलों और फलों के बीज भरे जा रहे हैं। इन गोलों को सुखाकर तैयार किया जाता है। देवज्योति का उद्देश्य है कि मानसून की शुरुआत से पहले इन 'बीज बमों' को खाली मैदानों, नदियों के किनारे और ऊसर जमीनों पर फेंक दिया जाए। जैसे ही बारिश की बूंदें इन गोलों पर पड़ेंगी, मिट्टी गीली होगी और बीजों से अंकुर निकलकर नए पौधों को जन्म देंगे।

विनाश नहीं, सृजन का संदेश: अभिभावक भी खुश

चुनाव के दौरान जब चारों तरफ बमबाजी की खबरें लोगों को डराती हैं, तब युवाओं की यह टोली अब तक 70 से अधिक स्थानों पर ये बीज बम फैला चुकी है। इस पहल से स्थानीय अभिभावक भी बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि इस तरह के कार्यों से नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति प्रेम और संतुलन बनाए रखने का बोध विकसित हो रहा है। यह पहल संदेश देती है कि युवा शक्ति चाहे तो ध्वंस के बजाय सृष्टि का मार्ग चुनकर समाज और प्रकृति को एक नया जीवन दे सकती है।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in