

नई दिल्लीः लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीनी सीसीटीवी कैमरों के मुद्दे पर संसद में पूछे गए प्रश्न और सरकार के जवाब का हवाला देते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार विदेशी निगरानी की सच्चाई छिपाकर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने लोकसभा में 25 मार्च को सीसीटीवी के संबंध में अतारांकित प्रश्न पूछे थे।
राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “सरकार ने हाल में चीनी सीसीटीवी कैमरों के सार्वजनिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन सरकारी इमारतों के भीतर ये कैमरे अब भी लगे हुए हैं। प्रतिबंधित चीनी ऐप बदले हुए नामों के साथ फिर सामने आ रहे हैं। विदेशी एआई मंच संवेदनशील डेटा प्रोसेस कर रहे हैं और सरकार के पास इन सब पर कहने के लिए कुछ नहीं है।”
रायबरेली से सांसद ने कहा, “मैंने संसद में इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सवाल पूछा। जवाब में बहुत कुछ कहा गया, लेकिन जो पूछा गया था, उसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला।” गांधी के अनुसार, उन्होंने पूछा था कि देश में उपयोग हो रहे कैमरे किन देशों से आए हैं, उनमें से कितने सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे हैं, कौन से विदेशी एआई मंच सरकारी डेटा प्रोसेस कर रहे हैं और कौन से प्रतिबंधित ऐप बदले नामों के साथ अब भी संचालित हो रहे हैं?
सरकार से नहीं मिला ठोस जवाब
उन्होंने कहा कि मंत्रालय के जवाब में न कोई ठोस आंकड़ा दिया गया और न ही किसी मंच का नाम बताया गया। उन्होंने कहा, “पांच साल पहले यह स्वीकार किया गया था कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 10 लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर के जोखिम पैदा करते हैं, लेकिन आज भी सरकार यह नहीं बता रही कि मौजूदा कैमरे सुरक्षित हैं या नहीं।” कांग्रेसा नेता ने आरोप लगाया कि यह देश को अंधेरे में रखने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए विदेशी निगरानी की सच्चाई छिपाकर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।
राहुल गांधी ने यह भी पूछा था कि क्या सरकार मोबाइल फोन और कैमरों सहित जासूसी में इस्तेमाल होने वाली प्रौद्योगिकी के बढ़ते मामलों से अवगत है और क्या उसे जानकारी है कि डेटा ‘ट्रांसफर’ के जोखिमों के कारण प्रतिबंधित चीनी मोबाइल ऐप नए नामों से काम कर रहे हैं?उन्होंने साइबर खतरों और विदेशी निगरानी से भारत के डेटा की सुरक्षा तथा डिजिटल संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा भी मांगा था।
केंंद्रीय मंत्री ने क्या जवाब दिया था
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लिखित उत्तर में कहा था, ‘‘भारत सरकार डिजिटल प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न साइबर सुरक्षा जोखिमों के प्रति सचेत है और पिछले 12 वर्षों में डिजिटल तंत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं जिनका उल्लेख नीचे (लिखित उत्तर में) किया गया है।’’ उन्होंने कहा था, “दूरसंचार नेटवर्क डिजिटल बुनियादी ढांचे का अहम हिस्सा हैं। वर्ष 2021 में सरकार ने ‘विश्वसनीय स्रोत’ पर राष्ट्रीय सुरक्षा निर्देश लागू किया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि दूरसंचार नेटवर्क में केवल भरोसेमंद स्रोतों के उपकरण ही लगाए जाएं।” प्रसाद ने कहा कि सरकार ने नेटवर्क और डेटा सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को भी मजबूत किया है।
उन्होंने कहा था, “सरकार ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 अधिसूचित किया है, जिसमें दूरसंचार नेटवर्क सुरक्षा के व्यापक प्रावधान हैं, और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम,2022 के जरिए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।”