

नई दिल्ली: सोने और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी प्रमुख कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके चेयरमैन व प्रमोटर राजेश मेहता पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। सेबी की अंतरिम जांच में कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों में भारी हेराफेरी और फर्जी कारोबार दिखाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस कार्रवाई के बाद गुरुवार को कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई और शेयर 5 फीसदी के लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
सेबी के आदेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपने समेकित (Consolidated) राजस्व को लगभग 15.35 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। जांच में सामने आया कि इसमें से करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 98.7 प्रतिशत राजस्व कथित रूप से फर्जी था। जबकि वास्तविक राजस्व केवल 20,111 करोड़ रुपये के आसपास पाया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ने कई संदिग्ध लेनदेन के जरिए कारोबार का आंकड़ा बढ़ाकर दिखाया। आरोप है कि कंपनी ने अपनी ही संबद्ध इकाइयों और कथित तौर पर फर्जी संस्थाओं के माध्यम से खरीद-बिक्री दिखाकर कारोबार का कृत्रिम विस्तार किया। इससे निवेशकों और बाजार को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति के बारे में गलत संदेश मिला।
सेबी की रिपोर्ट में ‘एफलुएंस’ नामक एक इकाई का भी उल्लेख किया गया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2022 से 2024 के बीच इस इकाई के साथ लगभग 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद दर्ज की थी। लेकिन जांच में ‘एफलुएंस’ ने साफ कहा कि राजेश एक्सपोर्ट्स उसका ग्राहक कभी नहीं रहा और कंपनी स्तर पर कोई कारोबारी संबंध नहीं था। उसने यह भी बताया कि उसका संपर्क केवल व्यक्तिगत रूप से राजेश मेहता के साथ था।
इसके अलावा, जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी के फंड्स को बिना बोर्ड और ऑडिट कमेटी की मंजूरी के प्रमोटर के व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। सेबी का मानना है कि इस तरह के लेनदेन कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों का उल्लंघन हैं और वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
यह पूरा मामला मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट में वर्षों से लंबित भारी-भरकम ट्रेड रिसीवेबल्स पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सेबी ने फॉरेंसिक ऑडिट सहित विस्तृत जांच शुरू की।
सेबी की कार्रवाई के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि कंपनी में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की भी करीब 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस खुलासे के बाद कंपनी का शेयर अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 90 प्रतिशत तक टूट चुका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की आगे की जांच और सेबी के अंतिम आदेश पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।