उपेक्षा की मार झेल रही शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की प्रतिमा!

शिवपुर बोटॉनिकल गार्डन के मुख्य द्वार पर स्थित स्मारक की हालत जर्जर
Sarat Chandra Chattopadhyay Statue Neglected near Shibpur Botanical Garden Gate
इस अवस्था में है शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की स्मारक मूर्ति
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : चारों ओर हरियाली से घिरे एशिया के प्रमुख ऐतिहासिक बोटॉनिकल गार्डन के प्रवेश द्वार पर साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की प्रतिमा आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। शिवपुर बोटॉनिकल गार्डन के मुख्य गेट में प्रवेश करते समय दाहिनी ओर स्थापित इस प्रतिमा की जर्जर हालत को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। खास बात यह है कि शरतचंद्र का जन्मदिन भी निकट है। उनका जन्म 15 सितंबर 1876 को हुआ था। हावड़ा के सामाजिक जीवन में भी शरतचंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय इतिहास के अनुसार वर्ष 1930 में हावड़ा नगर निगम के सफाईकर्मियों की हड़ताल के समाधान में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।

जन्मदिन से पहले उठी मरम्मत की मांग

शहर को अधिक सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने के प्रयासों में उनके योगदान की चर्चा आज भी होती है। इसलिए यह प्रतिमा स्थानीय लोगों के लिए केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि हावड़ा के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिमा नागरिकों के प्रयास से स्थापित की गई थी। वर्ष 2002 में समाजविरोधियों के हमले में इसे नुकसान पहुंचा था। बाद में शरत समिति और बी गार्डेन डेली वॉकर्स एसोसिएशन ने इसकी मरम्मत कराई। तत्कालीन विधायक ब्रजमोहन मजुमदार के प्रयास से भी इसका जीर्णोद्धार हुआ था। अब लोगों ने प्रतिमा की फिर से मरम्मत और उचित रखरखाव की मांग की है।

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