रूस से और एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत!

एस-500 खरीदने पर भी विचार, दिसंबर में पुतिन के भारत दौरे के वक्त हो सकती है डील
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एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम
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नयी दिल्ली : भारत रूस से कुछ और एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है। ऐसे पांच सिस्टम का सौदा पहले भी हुआ था, जिनमें से 3 भारत को मिल चुके हैं। रूस 2026 तक बाकी 2 एस-400 की डिलीवरी कर सकता है। नया सौदा इनके अतिरिक्त होगा। बताया जाता है कि दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के समय इस पर बातचीत हो सकती है।

पाकिस्तानी मिसाइल हमलों को नाकाम किया था

यह वही डिफेंस सिस्टम है, जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की ओर से किये गये ड्रोन और मिसाइल हमलों को हवा में ही मारकर नाकाम किया था। गौरतलब है कि भारत ने अक्टूबर, 2018 में रूस के साथ 5 अरब डॉलर का समझौता किया था। उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस सौदे को आगे बढ़ाने पर वह सीएएटीएसए कानून के तहत भारत पर पाबंदी लगा सकता है।

क्यों खास है एस-400?

एस-400 ट्रायम्फ रूस का सबसे एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। ये हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एअर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है। एस-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है यानी सड़क के जरिये इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है। इसमें 92एन6ई इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स का पता लगा सकता है।

भारत के पास एस-400 के 3 स्क्वाड्रन

भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है। एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। पहली स्क्वाड्रन पंजाब में तैनात की गयी है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। दूसरी स्क्वाड्रन सिक्किम में चीन सीमा के निकट तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी और तीसरी स्क्वाड्रन राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली।

एस-500 हासिल करने पर विचार!

ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 की कामयाबी के बाद रूस की कई मीडिया एजेंसियों ने भारत को एस-500 बेचने की पैरवी शुरू कर दी थी। बताया जाता है कि फिलहाल रूस के पास एक ही एस-500 है। यह सिस्टम 2021 में सेवा में आया था और इसे पहले मॉस्को में तैनात किया गया था। एस-500 को भविष्य की जंग के लिए तैयार किया गया है। एस-500 बैलिस्टिक मिसाइलें , हाइपरसोनिक हथियार, लो ऑर्बिट सैटेलाइट, एफ-35 और बी-2 बॉम्बर जैसे खतरनाक और फिफ्थ जेनरेशन विमानों को तबाह कर सकता है। इसकी रेंज बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के लिए 600 किमी है।

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