

नई दिल्ली : भारतीय रुपया इन दिनों अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में है और हाल ही में यह अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया। भारतीय मुद्रा 96 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया है जो कि इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, खासकर कच्चा तेल। ऐसे में जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है, जो कमजोर होने लगता है।
हालात को संभालने के लिए सरकार ने सोने जैसे बुलियन पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। इसका मकसद व्यापार घाटा कम करना और रुपये को सहारा देना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमत और डॉलर की मजबूती का दोहरा दबाव रुपये को कमजोर कर रहा है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में रुपये पर और दबाव देखने को मिल सकता है।