शोभनदेव को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने में देरी पर आरटीआई दायर

तृणमूल ने अपने नेता का नाम बताते हुए पत्र तो प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन संबंधित दस्तावेज अभी तक नहीं दिए गए हैं : विधानसभा सूत्र
शोभनदेव को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने में देरी पर आरटीआई दायर
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सोमवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल की 18वीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता नहीं दिए जाने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत आवेदन दाखिल करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक संख्या बल होने के बावजूद उनकी पार्टी को उसका हक नहीं दिया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि तृणमूल ने अपने विधायक दल के नेता का नाम बताते हुए पत्र तो प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन संबंधित दस्तावेज अभी तक नहीं दिए गए हैं। विधानसभा सचिवालय के सूत्रों ने तृणमूल द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह पत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के ‘लेटरहेड’ पर भेजा गया था। बालीगंज से 80-वर्षीय विधायक चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि उन्होंने तृणमूल के 80 विधायकों के समर्थन से अपनी पार्टी का विधायक दल का नेता चुने जाने की सूचना विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को दे दी गई है, लेकिन पत्र प्रस्तुत किए जाने के पांच दिन बाद भी उन्हें औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है। विधायक ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैने एक आरटीआई दाखिल किया है। मैंने विधानसभा में 2011, 2016 और 2021 में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति में अपनाई गई प्रक्रियाओं का विवरण मांगा है।’’

तृणमूल सूत्रों के अनुसार, 13 मई को अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में कहा गया था कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को 80 विधायकों के समर्थन से पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है। तृणमूल ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए 294-सदस्यीय विधानसभा में न्यूनतम 30 विधायकों की आवश्यकता से कहीं अधिक 80 विधायक होने के बावजूद पार्टी को प्रक्रियागत बहाने के आधार पर उसके वैध अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

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