रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी: बिना निशान वाली सर्जरी से कहीं बढ़कर

रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी: बिना निशान वाली सर्जरी से कहीं बढ़कर
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : थायरॉइड की बीमारी का पता चलने पर कई मरीजों के मन में सर्जरी को लेकर तुरंत कई तरह की चिंताएँ पैदा होने लगती हैं। इनमें दर्द, ठीक होने में लगने वाला समय और सबसे महत्वपूर्ण, गर्दन पर सर्जरी का दिखाई देने वाला निशान शामिल हैं। हालांकि, पारंपरिक थायरॉइड सर्जरी आज भी एक स्थापित उपचार पद्धति है, लेकिन रोबोटिक सर्जरी में हुई प्रगति ने चुनिंदा मरीजों के लिए थायरॉइड सर्जरी के अनुभव को बदलना शुरू कर दिया है। रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी एक न्यूनतम चीर-फाड़ वाली तकनीक है, जिसमें सर्जन रोबोटिक उपकरणों की मदद से थायरॉइड ग्रंथि के एक हिस्से या पूरी ग्रंथि को निकालते हैं। पारंपरिक सर्जरी के विपरीत, इसमें चीरा गर्दन से दूर लगाया जा सकता है। इसके लिए आमतौर पर बगल या छाती के रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे गर्दन पर सर्जरी का कोई स्पष्ट निशान नहीं दिखाई देता। हालांकि, रोबोटिक सर्जरी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि रोबोट अपने आप ऑपरेशन करता है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। रोबोटिक सिस्टम की हर गतिविधि सर्जन के नियंत्रण में होती है। यह तकनीक सर्जन की क्षमताओं को और बेहतर बनाती है। इसमें सर्जिकल क्षेत्र को हाई-डेफिनिशन, त्रि-आयामी (3D) और आवर्धित दृश्य में देखने की सुविधा मिलती है। साथ ही, इसमें अत्यधिक लचीले, कलाई की तरह मुड़ने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

सौंदर्य संबंधी लाभ से आगे सटीकता का महत्व

गर्दन पर दिखाई देने वाले निशान का न होना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण लाभ है, खासकर उन मरीजों के लिए जो अपनी शारीरिक बनावट को लेकर चिंतित रहते हैं। लेकिन रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी को केवल सौंदर्य संबंधी प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रोबोटिक सिस्टम से मिलने वाला बेहतर दृश्य और अधिक सटीकता सर्जन को उन नाजुक संरचनाओं के आसपास सावधानीपूर्वक सर्जरी करने में मदद कर सकती है, जैसे आवाज को नियंत्रित करने वाली रिकरेंट लैरिंजियल नर्व (Recurrent Laryngeal Nerve) और पैराथायरॉइड ग्रंथियां। इस तकनीक में हाथों के अनचाहे कंपन को कम करने की सुविधा भी होती है, जिससे सर्जरी के दौरान नियंत्रित गतिविधियां संभव होती हैं। उचित रूप से चुने गए मरीजों में ये विशेषताएं ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम करने और सर्जरी के बाद रिकवरी को अधिक आरामदायक बनाने में मदद कर सकती हैं।

क्या रोबोटिक सर्जरी हर मरीज के लिए उपयुक्त है?

थायरॉइड की समस्या से पीड़ित हर मरीज रोबोटिक सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होता। थायरॉइड में गांठ वाले मरीजों, शुरुआती चरण के कुछ थायरॉइड कैंसर के मरीजों और थायरॉइड के कुछ सौम्य बढ़ाव वाले मरीजों को विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद इस प्रक्रिया के लिए चुना जा सकता है। थायरॉइड की बीमारी का आकार, स्थान, उसका फैलाव और मरीज का समग्र स्वास्थ्य यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि रोबोटिक सर्जरी उपयुक्त होगी या नहीं। बहुत बड़े गॉइटर, आसपास की संरचनाओं तक फैल चुके एडवांस्ड थायरॉइड कैंसर या कुछ जटिल चिकित्सकीय स्थितियों वाले मरीजों के लिए पारंपरिक ओपन सर्जरी अधिक उपयुक्त हो सकती है। इसलिए, रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी में मरीज का सही चयन सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।क्या सर्जरी के बाद आवाज में बदलाव हो सकता है?थायरॉइड सर्जरी के बाद आवाज में बदलाव एक प्रमुख चिंता होती है, क्योंकि आवाज को नियंत्रित करने वाली नस थायरॉइड ग्रंथि के काफी करीब स्थित होती है। रोबोटिक उपकरणों की सटीकता और त्रि-आयामी आवर्धित दृश्य सर्जन को ऑपरेशन के दौरान इस नाजुक नस की पहचान करने और उसे सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, कोई भी सर्जरी जटिलताओं की संभावना को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकती। बेहतर परिणामों के लिए सावधानीपूर्वक सर्जिकल तकनीक और महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

क्या रोबोटिक सर्जरी से रिकवरी जल्दी होती है?

सर्जरी के बाद ठीक होने का समय हर मरीज के लिए अलग-अलग हो सकता है। हालांकि, कई मरीज ऑपरेशन के कुछ घंटों के भीतर चलने-फिरने लगते हैं और उन्हें एक या दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। हमारे अनुभव में, अधिकांश मरीजों को लगभग 48–72 घंटे तक दर्द की दवाओं की आवश्यकता होती है। गर्दन पर चीरा नहीं होने से रिकवरी के दौरान निगलने और गर्दन को हिलाने-डुलाने में भी अधिक आराम मिल सकता है। ये लाभ विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि उनके लिए लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल करना उचित नहीं हो सकता। यह समझना भी जरूरी है कि रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी केवल उन युवाओं के लिए नहीं है, जो गर्दन पर बिना निशान वाली सर्जरी चाहते हैं। सर्जरी के लिए उपयुक्तता केवल उम्र से तय नहीं होती। थायरॉइड की बीमारी की प्रकृति, मरीज का स्वास्थ्य और सर्जिकल मूल्यांकन कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। पूर्वी भारत में रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी का बढ़ता चलन सीके बिड़ला हॉस्पिटल्स, सीएमआरआई (कोलकाता) में हम वर्तमान में हर महीने लगभग 3–4 रोबोटिक थायरॉइड सर्जरी करते हैं। मरीजों और डॉक्टरों के बीच जागरूकता बढ़ने के साथ इनकी संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

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