जिलों में नदी प्रबंधन को मजबूती, “नो कॉस्ट” मॉडल से होगी ड्रेजिंग

मीडिया को संबोधित करते राज्य के सिंचाई एवं जलपथ विभाग के मंत्री डॉ. मानस रंजन भुइयां और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता
मीडिया को संबोधित करते राज्य के सिंचाई एवं जलपथ विभाग के मंत्री डॉ. मानस रंजन भुइयां और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के सिंचाई एवं जलपथ विभाग ने अपने अधीन महत्वपूर्ण कार्यों की गुरुवार को समीक्षा की। मंत्री डॉ. मानस रंजन भुइयां और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता के नेतृत्व में हुई समीक्षा बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेन्स कर बैठक में लिये गये महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। इनमें उत्तर बंगाल के चार जिलों में ड्रेजिंग और वृक्षारोपण कार्य शुरू करने से लेकर अगले सप्ताह होने जा रहे विदेशी संस्थान के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के साथ अन्य कई निर्णय शामिल है। मंत्री ने कहा कि उत्तर बंगाल के चार जिलों में नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करने के उद्देश्य से ड्रेजिंग और व्यापक वृक्षारोपण अभियान शुरू किया गया है। मंत्री ने कहा कि अचानक आने वाली बाढ़ अलीपुरदुआर, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसके अलावा तीस्ता नदी में अचानक आने वाली बाढ़ भी जलपाईगुड़ी, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग जिलों के लिए बेहद खतरनाक है। भूटान से आने वाली सीमा पार नदियों के किनारों पर 4 और 5 अक्टूबर, 2025 को हुई भारी बारिश के दौरान जल रिसाव और कटाव के कारण भारी नुकसान हुआ।

“नो कॉस्ट टू द स्टेट एक्सचेकर मॉडल”

राज्य सरकार ने ड्रेजिंग कार्य को “नो कॉस्ट टू द स्टेट एक्सचेकर मॉडल” के तहत करने का निर्णय लिया है। इस मॉडल के तहत राज्य सरकार के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। निजी भागीदारी या अन्य संसाधनों के माध्यम से परियोजना को लागू किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे नदियों की गहराई बढ़ेगी और जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी। घाटाल क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए घाटाल मास्टर प्लान को लागू करने की दिशा में कार्य तेज किया गया है।

कैनल सफाई व रखरखाव के लिए कमेटी

सिंचाई तथा जलपथ विभाग के पास 1300 कि.मी. कैनल की सफाई की जिम्मेदारी है। इस कार्य में लगे लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए विभाग एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की घोषणा की है। इसमें कोलकाता नगर निगम के अधिकारी भी शामिल होंगे। मंत्री ने कहा कि लोगों को कैनल में कुछ भी नहीं फेंकने के लिए जागरूक करना होगा। सफाई के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सफाई कर्मियों के लिए उच्चतम किट की व्यवस्था से लेकर काफी कुछ किया जायेगा।

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