

कोलकाता : तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर पार्टी के दो धड़ों के बीच सियासी टकराव के साथ अभिषेक बनर्जी की शैक्षणिक योग्यता का मुद्दा भी केंद्र में आ गया। विपक्षी दल के नेता ऋतव्रत बनर्जी ने अभिषेक की बीबीए और एमबीए डिग्री की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी हलफनामे से जोड़ दिया। आरोप कितना तथ्यात्मक है, यह अलग विषय है, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसने तृणमूल के भीतर एक नया मोर्चा खोल दिया है।
ऋतव्रत ने यूजीसी के हवाले से दावा किया कि अभिषेक की डिग्रियां वैध नहीं हैं और उन्हें अगली बार चुनाव लड़ने पर इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हालांकि, महज मंच से लगाये गये आरोपों से किसी शैक्षणिक डिग्री की वैधता तय नहीं होती। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड, पाठ्यक्रम की मान्यता और उस समय लागू नियामकीय प्रावधानों की जांच जरूरी होगी।
विवाद का दूसरा पहलू चुनावी हलफनामा है। किसी उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता संबंधी घोषणा सार्वजनिक दस्तावेज का हिस्सा होती है। इसलिए यदि इस पर सवाल उठाया जाता है तो उसका जवाब भी दस्तावेजी प्रमाणों के साथ देना राजनीतिक रूप से अधिक प्रभावी होगा।
अभिषेक ने फिलहाल आरोपों के तथ्यात्मक जवाब के बजाय ऋतव्रत पर राजनीतिक पलटवार किया। यही वजह है कि डिग्री का मुद्दा अब केवल व्यक्तिगत योग्यता का सवाल नहीं रहकर तृणमूल के दो गुटों के बीच विश्वसनीयता की लड़ाई बनता दिख रहा है।
दिलचस्प यह है कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी अतीत में विपक्ष की ओर से ‘फर्जी डिग्री’ जैसे आरोप लगाये जाते रहे हैं। ममता ने ऐसे आरोपों को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया है। अब अभिषेक की डिग्री पर सवाल उठने के बाद वही मुद्दा नये राजनीतिक संदर्भ में सामने आया है।