

वॉशिंगटन : ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान के कुछ महीनों बाद अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में तनाव के संकेत सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इजरायल को लेकर अपने काउंटरइंटेलिजेंस खतरे के आकलन को बढ़ाकर सबसे उच्च स्तर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच ईरान युद्ध की आगे की रणनीति को लेकर मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में एक आंतरिक संदेश जारी कर इस बदलाव की जानकारी दी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की मानव खुफिया (Human Intelligence) और तकनीकी सूचना संग्रह (Technical Intelligence Collection) की क्षमता को ‘क्रिटिकल लेवल’ का माना गया है।
सूत्रों के अनुसार, DIA के आकलन में सात पन्नों की एक रिपोर्ट और विस्तृत चार्ट शामिल है, जिसमें कई ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है जिनसे अमेरिकी सुरक्षा प्रतिष्ठान के भीतर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि रिपोर्ट में इन घटनाओं का विस्तृत खुलासा नहीं किया गया है।
वॉशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास ने रिपोर्ट में किए गए दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल अमेरिकी संस्थाओं या सरकारी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता। उन्होंने कहा कि इजरायली खुफिया एजेंसियों का ध्यान अपने दुश्मनों पर होता है, सहयोगी देशों पर नहीं। प्रवक्ता ने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
वहीं पेंटागन ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि यह कहानी ऐसे स्रोतों पर आधारित है जिन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान और मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में हुई एक फोन बातचीत भी काफी तनावपूर्ण बताई जा रही है।
बताया गया है कि ईरान युद्ध और लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को लेकर दोनों नेताओं की राय अलग-अलग है। ट्रंप ने बाद में स्वीकार भी किया कि बातचीत के दौरान उन्होंने नेतन्याहू को “पागल” कहा था।
अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम लागू होने के बाद ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते के जरिए संघर्ष समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। दूसरी ओर, इजरायल लगातार यह आशंका जता रहा है कि ईरान किसी भी समझौते का पूरी तरह पालन नहीं करेगा।
इन घटनाक्रमों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका और इजरायल अब मध्य पूर्व में अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्य अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से आधिकारिक तौर पर गठबंधन में किसी तरह की दरार से इनकार किया जा रहा है।