

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई के बीच सोमवार को विधानसभा परिसर में दिखी एक तस्वीर ने सियासी अटकलें तेज कर दीं। हालीशहर में ममता बनर्जी के काफिले पर हमले के विरोध में कालीघाट तृणमूल के प्रदर्शन में ऋतब्रत बनर्जी खेमे के तीन विधायक भी ममता के समर्थन में खड़े दिखे। हालांकि, इसे खेमे में दरार मानने से ऋतब्रत ने इनकार कर दिया।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कुणाल घोष, अलीफा अहमद और नयना बनर्जी समेत कालीघाट खेमे के नेता भाजपा विरोधी पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान मटियाब्रुज के अब्दुल खालेक मोल्ला, बशीरहाट उत्तर के तौसिफुर रहमान और बारुईपुर पूर्व के विभास सरदार भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
अब्दुल खालेक मोल्ला ने कहा कि ममता बनर्जी उनकी नेता हैं, लेकिन वे ऋतब्रत खेमे में हैं और आगे भी रहेंगे। विभास ने ममता को सर्वमान्य नेता बताते हुए हमले का विरोध किया। तौसिफुर ने कहा, “मुझे गलत समझाया गया था। ममता ही मेरी नेता हैं।”
इस बीच कुणाल घोष ने कहा कि इस संकट के दौर में अगर कोई इस अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाता है तो वही असली गद्दार है। उनके बयान पर पलटवार करते हुए ऋतब्रत ने कहा, “मैं किसी फासीवादी बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगा।”
ऋतब्रत ने कहा, “मैं विभास और तौसिफुर की जिम्मेदारी नहीं ले सकता, लेकिन अब्दुल खालेक मोल्ला पूरी तरह हमारे साथ हैं।” उन्होंने फ्लोर टेस्ट की चुनौती देते हुए दावा किया, “65 विधायक अब भी हमारे साथ हैं। फ्लोर टेस्ट हुआ तो हम बहुमत साबित कर देंगे।”
कालीघाट तृणमूल ने हमले की न्यायिक जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। हाजरा में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ नेताओं को हिरासत में भी लिया।