

नई दिल्ली: विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिशों के बीच ‘INDIA’ गठबंधन की अहम बैठक सोमवार को दिल्ली में होने जा रही है, लेकिन बैठक से पहले ही गठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। एक तरफ जहां 23 राजनीतिक दलों ने बैठक में शामिल होने की सहमति दी है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कुछ प्रमुख दलों ने दूरी बना ली है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में होने वाली इस बैठक में 23 पार्टियां हिस्सा लेंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ दल अपने-अपने कारणों से शामिल नहीं हो रहे हैं, जिससे गठबंधन की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं।
बैठक में शामिल होने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली पहुंच चुकी हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की है और सोनिया गांधी से भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बैठक में जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग, महंगाई, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार विपक्ष को निशाना बना रही है और आर्थिक मोर्चे पर आम जनता को राहत नहीं मिल रही।
आम आदमी पार्टी ने इस बैठक से किनारा कर लिया है। पार्टी नेता सोमनाथ भारती ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने के लिए भाजपा के साथ परोक्ष रूप से काम कर रही है।
AAP का मानना है कि कांग्रेस का नेतृत्व गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है।
सिर्फ AAP ही नहीं, बल्कि DMK और CPI(M) जैसी पार्टियों ने भी कांग्रेस के रवैये पर नाराजगी जताई है। DMK ने बैठक का बहिष्कार करने का फैसला लिया है, जबकि वाम दलों ने कांग्रेस से गठबंधन में जिम्मेदारी निभाने की मांग की है।
CPI(M) नेता हन्नान मोल्लाह ने साफ कहा कि गठबंधन का नेतृत्व करने वाली पार्टी को सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन कांग्रेस इस भूमिका में कमजोर नजर आ रही है।
विपक्षी दलों के बीच बढ़ती खींचतान यह संकेत दे रही है कि INDIA गठबंधन के लिए एकजुट रहना आसान नहीं होगा। जहां एक ओर बैठक के जरिए विपक्ष सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं अंदरूनी मतभेद उसकी एकजुटता को कमजोर कर सकते हैं।
दिल्ली में होने वाली यह बैठक विपक्षी राजनीति के लिए अहम मानी जा रही है, लेकिन इससे पहले ही उभरती दरारें यह साफ संकेत दे रही हैं कि 2026 के राजनीतिक समीकरणों में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी एकता बनाए रखना होगी।