

हवा के प्रवाह के अनुसार खुद आकार बदलेगा बाहरी आवरण
चेन्नई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (IIT-मद्रास) के अनुसंधानकर्ताओं ने पक्षियों की उड़ान से प्रेरित ‘मॉर्फिंग स्किन’ तकनीक विकसित की है, जो विमान के पंखों को हवा के प्रवाह के अनुसार अपना आकार बदलने में सक्षम बना सकती है। इसका उद्देश्य एयरोडायनामिक ‘स्टॉल’ को रोकना, विमान की लिफ्ट बढ़ाना और ड्रैग कम करना है। शोध के मुताबिक, इससे उड़ान की सुरक्षा और ईंधन दक्षता में भी सुधार हो सकता है।
‘स्टॉल’ उस स्थिति को कहते हैं, जब विमान के पंख पर्याप्त लिफ्ट पैदा नहीं कर पाते। ऐसा आमतौर पर पंख की सतह से हवा का प्रवाह अलग होने के कारण होता है। इससे लिफ्ट तेजी से घटती और ड्रैग बढ़ता है, जिससे विमान की ऊंचाई तथा नियंत्रण प्रभावित हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने पंख से जुड़ा एक अतिरिक्त लचीला ढांचा विकसित किया है। हवा के प्रवाह के अलग होने के संकेत मिलते ही यह ढांचा गतिशील रूप से अपना आकार बदलकर प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है।
अनुसंधान का नेतृत्व IIT-मद्रास के अनुप्रयुक्त यांत्रिकी एवं जैवचिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिंकू मुखर्जी ने किया। उन्होंने पूर्व छात्र एंटनी सैमुअल बी के साथ संख्यात्मक कोड पर काम किया, जबकि पूर्व छात्र डॉ. अरित्रस रॉय के साथ विंड टनल प्रयोग किए गए।
मुखर्जी ने कहा कि पक्षी उड़ान के दौरान बहुत कम ‘स्टॉल’ होते हैं, जबकि उनसे प्रेरित विमान अब भी इस समस्या का सामना करते हैं। टीम ने प्रकृति की अनुकूलन क्षमता को अभियांत्रिकी और आधुनिक संसाधनों के जरिये दोहराने का प्रयास किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, विमान के पंख उड़ान के दौरान एक निश्चित कोण पर झुककर अतिरिक्त लिफ्ट पैदा करते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में विकसित बाहरी आवरण स्वयं को सुरक्षित कोण पर समायोजित कर सकता है, जिससे पर्याप्त लिफ्ट बनी रहती है और विमान को हवा में बनाए रखने में मदद मिलती है।
इस तकनीक का संभावित उपयोग वाणिज्यिक विमानों में भी हो सकता है। विशेष रूप से छोटे या व्यस्त रनवे से उड़ान भरने और उतरने के दौरान यह अतिरिक्त सुरक्षा और दक्षता प्रदान कर सकती है।
यह अध्ययन European Journal of Mechanics - B/Fluids में प्रकाशित हुआ है। शोध के सह-लेखक डॉ. रिंकू मुखर्जी और डॉ. अरित्रस रॉय हैं। टीम का मानना है कि अनुकूलनशील पंख तकनीक भविष्य में विभिन्न उड़ान परिस्थितियों में विमानों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है।