ममता के पास 19, विमान के पास 12 किताबें लंबित!

विधानसभा लाइब्रेरी में किताबों की वापसी बनी बड़ी चुनौती
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा की लाइब्रेरी इन दिनों किताबों की वापसी को लेकर असमंजस में है। पिछली तृणमूल सरकार के कार्यकाल में कई विधायकों और मंत्रियों ने लाइब्रेरी से किताबें लीं, लेकिन समय पर वापस नहीं कीं। सूत्रों के अनुसार, ऐसी लंबित किताबों की संख्या कई अधिक है। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद कई किताबें अब तक वापस नहीं आई हैं।

पता चला है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास 19 किताबें लंबित हैं। इनमें रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘रवींद्र रचनावली’ के 18 खंड और काव्य संग्रह ‘संचयिता’ शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये किताबें मुख्यमंत्री के चैंबर में रखी हैं, लेकिन लाइब्रेरी को वापस नहीं मिली हैं। वहीं, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी के पास 12 किताबें हैं।

इनमें 20 जून 1947 को पश्चिम बंगाल को अलग राज्य के रूप में भारत में शामिल किए जाने के प्रस्ताव से जुड़ा महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज भी शामिल है। लाइब्रेरी रिकॉर्ड के अनुसार, यह दस्तावेज उनके संरक्षण में था। विमान बनर्जी का कहना है कि यदि दस्तावेज स्पीकर के लिए जारी हुआ था, तो वह स्पीकर के चैंबर में ही होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपना सामान वहीं छोड़ा था।

हालांकि, लाइब्रेरी प्रशासन के लिए चैंबर में जाकर दस्तावेज की तलाश करना मुश्किल है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह चैंबर में जाकर तलाशी नहीं ली जा सकती। लाइब्रेरी विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, विधायक एक बार में चार किताबें ले सकते हैं और उन्हें नियम के अनुसार एक से डेढ़ महीने में वापस करना होता है लेकिन कई विधायक समय पर किताबें लौटाना भूल जाते हैं।

अब लाइब्रेरी प्रशासन इस मामले में संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष से जल्द बातचीत करने की तैयारी में है।

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