

कोलकाता: चुआड़ विद्रोह की नेत्री रानी शिरोमणि के ऐतिहासिक ‘कर्णगढ़’ का बहुप्रतीक्षित पुनर्निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है। नवान्न सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने इसके लिए लगभग 2.5 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।
मंजूरी मिलते ही गढ़ के ध्वस्त हिस्सों को हटाकर महल, हवामहल ‘जलहरी’, आठचाला शैली के मंदिर, शिव मंदिर और अन्य अवशेषों के संरक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है। ठेकेदार को 300 दिनों में काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। पश्चिम मिदनापुर के कर्णगढ़ के संरक्षण को लेकर सक्रिय कई संस्थाओं ने इस पहल का स्वागत किया है।
सूत्रों के अनुसार राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग की देखरेख में पुरातत्व निदेशालय और पीडब्ल्यूडी यहां बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार कार्य करेंगे। एक अधिकारी के अनुसार, तीन वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने कर्णगढ़ को संवारने और इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया था। वर्तमान में क्षेत्र में कई विकास कार्य हो चुके हैं, जिससे पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है।
रानी शिरोमणि चुआड़ विद्रोह की प्रमुख महिला नेता थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। उनका विशाल प्रासाद लगभग 120 बीघा क्षेत्र में फैला था। गढ़ के आसपास आज भी प्राचीन मंदिर, जलहरी और लेटराइट पत्थर से बने अवशेष मौजूद हैं। पता चला है कि शिक्षा विभाग ने रानी की भूमिका को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पुनर्निर्माण पूरा होने पर कर्णगढ़ के एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में उभरने की उम्मीद है।
रानी शिरोमणि कौन थीं?
18वीं–19वीं शताब्दी में बंगाल के ऐतिहासिक चुआड़ विद्रोह की प्रमुख नेत्री थीं रानी शिरोमणि। उन्होंने किसान आंदोलन को आधार बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। राजकोष से धन खर्च करने के साथ-साथ उन्होंने जनबल से भी विद्रोह को मदद दी। इतना ही नहीं, एक समय चुआड़ विद्रोह का पूरा संचालन कर्णगढ़ से ही किया जाता था। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के जन्म से लगभग दस वर्ष पहले, रानी शिरोमणि 17 सितंबर 1812 को बंदी अवस्था में मृत्यु को प्राप्त हुईं। उनकी वीरता और मातृभूमि के प्रति प्रेम आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है।