

श्रीनगर/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में हजारों लोग पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए प्रशासन ने कई क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित की है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ स्थानीय नेताओं ने भारत से हस्तक्षेप की अपील भी की है। वहीं, रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जे.एस. सोढ़ी का कहना है कि लंबे समय से जारी असंतोष के कारण पाकिस्तान के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उनके अनुसार, यदि हालात नहीं बदले तो आने वाले समय में PoK में और बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है। यह उनका विश्लेषण है।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का प्रशासनिक नियंत्रण काफी हद तक इस्लामाबाद से संचालित होता है। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि क्षेत्र के महत्वपूर्ण फैसलों में स्थानीय प्रशासन की भूमिका सीमित रहती है। यही वजह है कि लंबे समय से कई सामाजिक और आर्थिक मांगों को लेकर असंतोष बना हुआ है।
साल 2023 में गठित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने विभिन्न स्थानीय संगठनों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को संगठित किया। इसमें ट्रांसपोर्टर, व्यापारी, दुकानदार और अन्य नागरिक समूह शामिल हैं। संगठन का कहना है कि क्षेत्र में महंगाई, बिजली संकट, रोजगार और नागरिक सुविधाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारी पिछले दो वर्षों के आंदोलनों में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा, मीरपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, संपत्ति हस्तांतरण पर टैक्स में राहत और बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिजली उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र होने के बावजूद PoK के कई हिस्सों में नियमित बिजली उपलब्ध नहीं है।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। वहीं, वर्तमान विरोध प्रदर्शनों और स्थानीय नेताओं द्वारा किए जा रहे दावों को लेकर भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।