

70 कर्मचारी होंगे प्रभावित
मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 15 अक्टूबर से सभी सेवानिवृत्त नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति और रीएंगेजमेंट प्रक्रिया को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। यूनिवर्सिटी के एक्टिंग रजिस्ट्रार द्वारा वाइस-चांसलर के आदेश के तहत शुक्रवार को जारी इस आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत सभी रिटायर्ड कर्मियों का कार्यकाल 14 अक्टूबर को स्वतः समाप्त हो जाएगा। इस अचानक आए नीतिगत बदलाव से लगभग 70 अनुभवी कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। प्रशासन ने भविष्य के लिए साफ कर दिया है कि रीएंगेजमेंट या री-एम्प्लॉयमेंट से जुड़ा कोई भी नया आवेदन अब स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालय के भीतर प्रशासनिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
जादवपुर यूनिवर्सिटी के फैसले पर विरोध तेज
इस फैसले के खिलाफ शैक्षणिक और शोध हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) के जनरल सेक्रेटरी पार्थ प्रतिम रॉय ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि अनुभवी कर्मचारियों के हटने से प्रयोगशालाओं के दैनिक कामकाज और महत्वपूर्ण रिसर्च गतिविधियों में गंभीर रुकावटें पैदा होंगी। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस व्यवस्था के जरिए अकुशल कार्यों को महंगे दामों पर प्राइवेट एजेंसियों को आउटसोर्स करने की योजना बना रहा है, जिससे शैक्षणिक और शोध माहौल को और अधिक नुकसान पहुंचेगा। इस फैसले ने एक तरफ जहां प्रशासनिक शुचिता और खर्चों में कटौती की बहस छेड़ दी है, वहीं दूसरी ओर यूनिवर्सिटी के सुचारु संचालन को लेकर अनिश्चितता भी पैदा कर दी है।