ई-रुपी प्रणाली के खिलाफ राशन डीलरों ने जताया विरोध

बताया इसे 'राष्ट्रीय मुद्दा', दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, PDS ढांचे को ध्वस्त करने की साजिश का लगाया आरोप
Ration dealers protested against the e-rupee system.
सांकेतिक फोटो
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'ई-रुपी' (e-RUPI) आइटम आधारित वाउचर सिस्टम को लेकर ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन (AIFPSDF) ने भारी विरोध जताया है। फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव विश्वंभर बासु ने कहा कि यह मौजूदा खाद्य वितरण व्यवस्था के लिए 'डेथ-बेल' यानी मौत की घंटी है। फेडरेशन का मानना है कि यह कदम न केवल पारंपरिक वितरण ढांचे को नष्ट कर देगा, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के हितों पर भी गहरा आघात करेगा। फेडरेशन ने इस अवधारणा की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि दशकों से चली आ रही समय-परीक्षित PDS प्रणाली, जिसमें भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राशन दुकानों का एक मजबूत नेटवर्क शामिल है, उसे बिना किसी व्यापक चर्चा के अचानक बदला जा रहा है। यह विचलन खाद्य सुरक्षा के स्तंभों, खरीद और वितरण प्रक्रिया को हिलाकर रख देगा। बसु ने चेतावनी दी कि ई-रुपी के माध्यम से प्रस्तावित नया मोडस ऑपरेंडी (कार्यप्रणाली) पूरी तरह से अव्यावहारिक है। यह कार्यप्रणाली न केवल राशन डीलरों के अस्तित्व को खतरे में डालेगी, बल्कि उन करोड़ों गरीब उपभोक्ताओं के लिए भी वंचना का कारण बनेगी जो इस डिजिटल जटिलता में उलझ कर रह जाएंगे। फेडरेशन ने इसे 'राष्ट्रीय मुद्दा' मानते हुए स्पष्ट किया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ डीलरों की नहीं, बल्कि किसानों और लाभार्थियों के हक की भी है। संगठन ने आह्वान किया है कि इस 'शॉक' देने वाले सरकारी प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट होकर विरोध किया जाए ताकि देश की पारंपरिक खाद्य श्रृंखला को बचाया जा सके।

ऐसे किया जायेगा PDS में ई-रुपी की प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत काम

1. आइटम-आधारित डिजिटल वाउचर : लाभार्थियों को अब उनके मोबाइल पर SMS या QR कोड के रूप में 'आइटम-वाइज' वाउचर मिलेगा। इसका मतलब है कि प्रत्येक खाद्य वस्तु (गेहूं, चावल, चीनी आदि) के लिए विशिष्ट डिजिटल कूपन होगा।

2. किसी भी दुकान से राशन लेने की आजादी : इस प्रणाली के तहत लाभार्थी अपनी पसंद की किसी भी उचित दर वाली दुकान पर जाकर अपना वाउचर भुना सकेंगे। इससे राशन डीलरों के बीच 'गुणवत्ता' को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

3. आधार लिंक और गैर-हस्तांतरणीय : ये वाउचर लाभार्थी के आधार से जुड़े होंगे और इन्हें किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकेगा। ये एक निश्चित महीने के लिए ही मान्य होंगे।

4. बिना इंटरनेट/बैंक खाते के उपयोग : इसके लिए स्मार्टफोन या बैंक खाते की अनिवार्यता नहीं होगी। साधारण फीचर फोन पर SMS के जरिए भी इसे प्राप्त और उपयोग किया जा सकेगा।

5. पायलट प्रोजेक्ट की योजना : खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने इसे शुरुआत में कम से कम एक ग्रामीण और एक शहरी जिले में 3 महीने के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाने का प्रस्ताव दिया है हालांकि राशन डीलर इस प्रणाली का विरोध कर रहे हैं।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in