

भुवनेश्वर : अगले 15 दिनों तक पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं होंगे। सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 कलश पानी से स्नान कराया गया। मंदिर प्रांगण में हुए समारोह को देखने लिए ओडिशा के पुरी शहर में लाखों भक्त उमड़ पड़े। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जगन्नाथ प्रभु अब 15 दिनों के लिए बीमार हो जाएंगे। उन्हें उपचार के लिए अनवसर गृह ले जाया जाएगा। इस कारण वह मंदिर के गर्भगृह में दर्शन नहीं देंगे।
ओडिशा में होने वाले वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले पूर्णिमा की तिथि को देव स्नान का आयोजन होता है। इस मौके पर सोमवार सुबह भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से बाहर लाया गया। मंदिर परिसर के ऊंचे चबूतरे पर पवित्र सुना कुआं से 108 कलश जल से उन्हें स्नान कराया गया। देवस्नान को देखने के लिए मंदिर के सामने मुख्य सड़क पर लाखों भक्त उमड़े। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मंदिर पहुंचे और साष्टांग दंडवत कर आशीर्वाद लिया।
मान्यता है कि स्नान के बाद देव को ज्वर यानी बुखार आ जाएगा। अब अगले 15 दिनों तक भगवान एकांतवास में रहेंगे, जहां उन्हें औषधि दी जाएगी
इस धार्मिक परंपरा के बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को अनवसर गृह में जाया गया, क्योंकि मान्यता है कि स्नान के बाद देव को ज्वर यानी बुखार आ जाएगा। अब अगले 15 दिनों तक भगवान एकांतवास में रहेंगे, जहां उन्हें औषधि दी जाएगी। 14 जुलाई 2026 को नेत्रोत्सव होगा और भगवान एक बार फिर नए रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। 15 जुलाई (बुधवार) को उभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें वार्षिक रथयात्रा में शामिल रथों नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन की विशेष पूजा की जाएगी।
नंदीघोष भगवान जगन्नाथ का रथ है। 45 फुट ऊंचे इस रथ में 16 पहिये होते हैं और इस पर लाल-पीले रंग का ध्वज लगता है। बलभद्र भगवान का रथ तालध्वज 45.6 फुट ऊंचा होता है, जिसमें 14 पहिये होते हैं। देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन 44.6 फुट ऊंचा होता है। इसमें 12 पहिये होते हैं और इस पर लाल-काला ध्वज होता है। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथा गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। नौ दिन बाद 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा होगी, जबकि 25 जुलाई को सुना बेषा होगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ स्वर्ण आभूषणों में सजकर भक्तों को दर्शन देंगे।