राज्यसभा डायरी : बजट सत्र 2026 पहला चरण

सोशल मीडिया पर सरकार करे कंट्रोल, जागरूकता अभियान चलाए, कठोर दंड दे
राज्यसभा डायरी : बजट सत्र 2026 पहला चरण
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सोशल और डिजिटल मीडिया की सामग्री बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल रही है। आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं। बुधवार को भाजपा सांसद बाबू भाई देसाई और कांग्रेस सांसद जे.बी. मथेर ने सदन में इस पर चिंता जताई। हाल ही में किशोरों की आत्महत्याओं के मामलों का उदाहरण दिया। बाबू भाई ने कहा कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी सुनिश्चित करे, दंड देने का प्रावधान बनाए और जागरूकता अभियान चलाए। देसाई ने कहा कि यदि हमारे बच्चे ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो ऐसी डिजिटल क्रांति का क्या लाभ होगा।

केरल से सांसद जे.बी. मथेर ने सदन को बताया कि सोशल मीडिया बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। मथेर ने अपने राज्य का उदाहरण दिया, जहां मंगलवार को 16 साल की एक किशोरी ने इसलिए आत्महत्या कर ली कि उसके एक ऑनलाइन दोस्त की मौत हो गई थी। मथेर ने कहा कि उन्होंने बच्ची के माता-पिता और स्कूल टीचर से बात की है। मथेर ने गाजियाबाद की उन तीन बहनों का उदाहरण भी दिया जिन्होंने कोरियन गेम के कारण सामूहिक आत्महत्या कर ली थी। मथेर ने सभापति से मांग की कि सरकार गंभीरता से इस पर विचार करे, सोशल मीडिया पर नियंत्रण करे। सरकार बच्चों की मानसिक सेहत को अपनी प्राथमिकता बनाए और इसको स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करे।

सांसदों को जनता करे हायर और फायर, मतदाताओं को मिले रिकॉल का अधिकार : राघव चड्डा

आम आदमी पार्टी के युवा सांसद राघव चड्डा ने सदन में आज एक अजीबोगरीब प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि मतदाता यदि अपने विधायक और सांसद को चुनने का अधिकार रखते हैं तो काम न करने पर वापस बुलाने का अधिकार भी होना चाहिए। पांच साल बहुत लंबा समय है। यदि उनके जनप्रतिनिधि काम नहीं करते तो उन्हें जनमत से सत्ता से वापस कर देना चाहिए। राघव चड्डा ने कहा कि यदि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर और न्यायाधीशों को महाभियोग से हटाने का अधिकार है तो सांसदों और विधायकों पर महाभियोग कानून क्यों नहीं लागू होना चाहिए। चड्डा ने कहा कि दुनिया के 24 देशों में राइट टू रिकॉल लागू है, फिर भारत में क्यों नहीं लागू हो सकता। लेकिन कम से कम 50 फीसदी मतदाताओं की सहमति होनी चाहिए और हटाए जाने के ठोस कारण प्रमाण सहित दिए जाने चाहिए। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि यह लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक विचार है।

सोयाबीन किसानों के खिलाफ है भारत-अमेरिका ट्रेड डील : अशोक सिंह

मध्य प्रदेश से कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने सदन को बताया कि हाल ही में की गई भारत-अमेरिका डील सोयाबीन किसानों के साथ सरासर धोखा है। यह सोयाबीन किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। अमेरिका से सस्ता सोयाबीन और सोयाबीन का तेल आयात किया जाएगा। इससे प्रदेश के 150 प्रोसेसिंग प्लांट बंद हो जाएंगे। अशोक सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने चली थी, लेकिन उनकी तो अपनी लागत भी पूरी नहीं हो रही है। सरकार ने 5000 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम मूल्य देने का वादा किया था, लेकिन बेचारे किसानों ने 3000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अपना सोयाबीन बेचा। अशोक सिंह ने कहा कि अब तक 600 से ज्यादा सोयाबीन उत्पादक किसानों ने आत्महत्या कर ली है।

कंजर जाति को दिया जाए सम्मानजनक नाम : रामगोपाल यादव

समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने बुधवार को कंजर जाति का नाम बदल दिए जाने का प्रस्ताव सदन में रखा। यादव ने कहा कि कंजर जाति भारत के हर प्रांत में पाई जाती है। वैसे ये अनुसूचित जाति में आते हैं, लेकिन अंग्रेज सरकार ने इन्हें आपराधिक जाति का विशेषण दिया था। इनकी जाति के साथ ‘क्रिमिनल’ शब्द जुड़ा होने के कारण इनके बच्चों को स्कूल में अपमान सहना पड़ता है और जब भी कहीं कोई चोरी होती है तो पुलिस इन्हें बिना किसी सबूत के पकड़कर ले जाती है। राम गोपाल यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इस ओर ध्यान दे, कंजर नाम बदला जाए ताकि समाज में इन्हें सम्मान मिल सके।

भाजपा सांसद राधा मोहन अग्रवाल ने उठाया दिल छू लेने वाला मामला

अपनी जमीन-जायदाद और गहने बेचकर अपने बच्चों को सुनहरे भविष्य के लिए विदेश भेजने वाले माता-पिता बुढ़ापे में अकेले क्यों रह जाते हैं? मौत होने पर औलाद अंतिम संस्कार करने भी न आए, यह भारत के समाज के लिए चिंता की बात है। भाजपा सांसद राधा मोहन अग्रवाल ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लगभग साढ़े तीन करोड़ भारतीय विदेशों में बसे हैं और उनके माता-पिता, सास-ससुर भारत में हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि वे विदेश में अपने माता-पिता को तभी बुलाते हैं जब उन्हें अपने बच्चे पालने होते हैं। जिन माता-पिता ने इन्हें जीवन की पूंजी लगाकर विदेश भेजा, उन्हें भूल जाते हैं।

राधा मोहन अग्रवाल ने इंदौर की उस ताजा घटना का हवाला दिया जिसमें पहले मां और फिर पिता की मौत हो गई थी। लाशें सड़ गईं, कीड़े पड़ गए, लेकिन संतान अंतिम संस्कार करने नहीं आई। अग्रवाल ने कहा कि 2024-25 में ऐसी 500 घटनाएं हो चुकी हैं। 2007 में एक कानून बनाया गया था, वह नख-दंत विहीन है। यदि माता-पिता अदालत के दरवाजे पर जाएंगे तभी उन्हें न्याय मिलेगा। राधा मोहन अग्रवाल ने विदेश मंत्री को सुझाव दिया कि विदेश में बसे भारतीय सरकार को एक हलफनामा दें कि वे अपने माता-पिता का ध्यान रखेंगे, अपने वेतन का कुछ हिस्सा नियमित रूप से हर महीने भेजेंगे, बुढ़ापे में उनका ध्यान रखने के लिए केयरटेकर नियुक्त करेंगे और माता-पिता हर छह महीने सरकार को प्रमाणपत्र देंगे कि उनके बच्चे उनकी नियमों के अनुसार देखभाल कर रहे हैं। जो नियमों का पालन नहीं करते, उनका पासपोर्ट भारत सरकार रद्द कर दे

बंदरों और कुत्तों के आतंक से नागरिकों को बचाए सरकार : जावेद अली

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली ने आज कुत्तों और बंदरों के आतंक का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों पर दोनों जानवरों के घातक हमले महामारी का रूप ले चुके हैं। लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दिए आंकड़ों का हवाला देते हुए जावेद अली ने बताया कि वर्ष 2024-25 में कुत्तों और बंदरों के हमलों की लगभग 37 लाख घटनाएं हुईं। उत्तर प्रदेश से सांसद जावेद अली ने अपने जिले और यूपी के अन्य जिलों की घटनाओं के क्रमवार आंकड़े सदन के सामने रखे। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाकर आम नागरिकों को कुत्तों और बंदरों के हमलों से बचाए।

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