New Delhi
सोनिया गांधी

राजीव को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तो मैं इसके विरोध में थी : सोनिया गांधी

अपनी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : ए जर्नी ऑफ लव’ का उल्लेख करते हुए यह कहा
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नयी दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने मंगलवार को अपने पति एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब राजीव को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तो वह पूरी तरह इसके विरोध में थीं। उन्होंने 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अपनी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : ए जर्नी ऑफ लव’ का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि उनके बारे में दशकों से दूसरे लोग कहानी बताते आए हैं और अब अपनी कहानी कहने की उनकी बारी है तथा किताब सामने आने पर कुछ ‘तमाशा’ होना तय है। सोनिया गांधी ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने जीवन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बात की है। वीडियो में राजीव गांधी का जिक्र करते हुए सोनिया ने कहा, ‘जब मेरे पति से प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, मैं इसके पूरी तरह विरोध में थी...।’ हालांकि, उन्होंने वीडियो में इस प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश नहीं डाला। वीडियो में एक जगह वह कहती हैं, ‘मुझे नहीं पता कि मुझे पूरी कहानी बतानी चाहिए या नहीं।’ राजीव गांधी पहली बार 31 अक्टूबर, 1984 को भारत के प्रधानमंत्री बने। उनकी माता और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्होंने यह पद संभाला। उस समय वह 40 वर्ष के थे और भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी ने ‘X’ पर वीडियो साझा करते हुए कहा, ‘इस किताब के आने पर कुछ तमाशा तो होना ही है। आखिरकार, दूसरे लोग दशकों से मेरी ‘कहानी’ बताते आए हैं, अब मेरी बारी है।’ उन्होंने अपनी कहानी स्वयं लिखने के पीछे की वजह का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उसमें से काफी कुछ पूरी तरह सही नहीं था। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा कि चूंकि मेरे बारे में बहुत कुछ लिखा गया है और उसमें से काफी कुछ पूरी तरह सही नहीं था, या फिर वह गढ़ा गया था अथवा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। इसलिए मुझे लगा कि अब मैं अपनी कहानी लिख सकती हूं और तथ्यों तथा चीजों को वैसे ही बता सकती हूं, जैसी वे वास्तव में थीं।’ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वह इसे अपना ‘पक्ष (वर्जन)’ नहीं, बल्कि अपनी ‘कहानी’ बताना चाहेंगी। सोनिया ने कहा, ‘लोगों के अलग-अलग विचार होते हैं। कुछ लोग आपके बारे में अपनी राय बदल सकते हैं। कुछ लोगों की राय और खराब हो सकती है, लेकिन ऐसा ही होता है। जब आप कोई किताब लिखते हैं या सार्वजनिक जीवन में होते हैं तो यही होता है।’ उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ‘कुछ तमाशा तो होना ही है, जैसा कि आप यहां कहते हैं।’

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