

बेंगलुरु : कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच कर रहे अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार के बेंगलुरु स्थित आवास पर छापेमारी की। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि सीआईडी अधिकारियों ने साहूकार के डॉलर्स कॉलोनी स्थित आवास के अलावा उनके कुछ रिश्तेदारों के परिसरों की भी तलाशी ली। सोमवार से शुरू हुई कार्रवाई मंगलवार को भी जारी रही। छापेमारी ऐसे समय हुई है, जब कर्नाटक हाई कोर्ट ने मामले में साहूकार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
सीआईडी की यह कार्रवाई कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा साहूकार को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने से इनकार किए जाने के एक दिन बाद हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए। न्यायालय ने साहूकार पर लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया ‘‘सुनियोजित धोखाधड़ी’’ की ओर संकेत करने वाला बताया था।
अदालत ने भर्ती व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताते हुए यह भी कहा था कि ऐसी घटनाओं से लोगों का व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह उठता जा रहा है। न्यायालय ने सवाल किया था कि यदि इस तरह की अनियमितताएं जारी रहीं तो मेधावी छात्रों के भविष्य और उनके अवसरों का क्या होगा।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी की जांच का एक प्रमुख हिस्सा परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और ‘ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन’ (ओएमआर) शीट में कथित हेरफेर से जुड़ा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भर्ती परीक्षा के रिकॉर्ड में किसी तरह का बदलाव किया गया था या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो इसके पीछे कौन लोग शामिल थे ?
जांचकर्ताओं की नजर भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर बिचौलियों की भूमिका और उन्हें किए गए भुगतान पर भी है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा था और इसमें केपीएससी के अधिकारियों अथवा बाहरी लोगों की क्या भूमिका रही।
सीआईडी फिलहाल 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही है। इस संबंध में 24 जुलाई को विधान सौध थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई और जांच एजेंसी ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।
जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि परीक्षा से लेकर परिणाम और चयन तक की प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। इसके अलावा कथित तौर पर उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किसी तरह का नेटवर्क संचालित होने की भी जांच की जा रही है।
सीआईडी इस मामले में अब तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी और केपीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार तथा कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार कर चुकी है। इन गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसी ने कथित भर्ती घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण तेज किया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, गंगवार की पूर्व परीक्षा नियंत्रक के रूप में भूमिका और कथित बिचौलिए की गतिविधियां जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। अब साहूकार और अन्य आरोपियों की कथित भूमिका की भी विस्तार से पड़ताल की जा रही है।
साहूकार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दो बेटियों का औद्योगिक विस्तार अधिकारियों के पदों पर कथित रूप से अवैध तरीके से चयन कराने में मदद की। इन्हीं आरोपों के सामने आने के बाद उनकी भूमिका जांच के दायरे में आई।
सीआईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या साहूकार ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया था। साथ ही, कथित चयन में किसी अधिकारी, कर्मचारी या बिचौलिए की भूमिका रही या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
साहूकार के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 13 जुलाई को उन्हें केपीएससी अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी के रडार पर आए।
निलंबन के बाद साहूकार ने अपने खिलाफ लगे आरोपों के संबंध में कानूनी राहत के लिए अदालत का रुख किया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
सीआईडी की कार्रवाई केवल साहूकार के आवास तक सीमित नहीं रही। अधिकारियों ने उनके रिश्तेदारों से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान सोमवार को शुरू हुआ और मंगलवार को भी जारी रहा।
तलाशी का उद्देश्य कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन अथवा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाना बताया जा रहा है। हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इस मामले में हाई कोर्ट की टिप्पणियों ने भी कथित भर्ती अनियमितताओं की गंभीरता को रेखांकित किया है। अदालत ने कहा था कि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और आरोपों से ‘‘सुनियोजित धोखाधड़ी’’ का संकेत मिलता है।
अदालत की चिंता विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर थी, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत और योग्यता के आधार पर अवसर पाने की उम्मीद रखते हैं। भर्ती प्रक्रिया में कथित हेरफेर से न केवल उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि सार्वजनिक भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
साहूकार के आवास और रिश्तेदारों के परिसरों पर छापेमारी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक और कथित बिचौलिए की गिरफ्तारी तथा उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सीआईडी मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल जांच का केंद्र 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया है, लेकिन एजेंसी अन्य कथित अनियमितताओं और आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
जांच में परीक्षा रिकॉर्ड, ओएमआर शीट, कथित भुगतान और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों तथा बिचौलियों के बीच संपर्कों की कड़ियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। आने वाले दिनों में इन साक्ष्यों के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां या कार्रवाई हो सकती है।