

नई दिल्लीः कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को दावा किया कि सरकार की प्रमुख संस्थाओं में वरिष्ठ पदों पर बहुजनों की हिस्सेदारी नहीं है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने अपने ‘जनसंसद’ कार्यक्रम में ग्रामीण बैंक के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों के एक समूह से मुलाकात के बाद यह टिप्पणी की। वह समाज के विभिन्न वर्गों के समूहों से अक्सर मुलाकात करते हैं और इसे उन्होंने ‘जनसंसद’ का नाम दिया है।
राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट किया, ‘‘जनसंसद में कुछ दिनों पहले ग्रामीण बैंक के एसी-एसटी वेलफेयर एसोशिएसन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई। उनकी समस्याएं ध्यान से सुनीं तो वही बात स्थापित हुई जो मैं हमेशा से कहता आया हूं कि बहुजनों की हिस्सेदारी किसी भी संस्था के वरिष्ठ पदों पर है ही नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिनिधिमंडल में आए साथियों ने बताया कि किस तरह नीतिगत तरीके से प्रोन्नति के लिए नियम होने के बावजूद उनके साथ इसमें भेदभाव किया जाता है। कभी कामकाज, कभी योग्यता के बहाने से उनकी तरक्की रोक दी जाती है। और तो और अगर ये दलित-आदिवासी संगठन के पदाधिकारी आवाज़ उठाते हैं तो उनका बार-बार और सुदूर क्षेत्रों में तबादला करके सज़ा दी जाती है।’’
राहुल ने दिया तर्क
कांग्रेस नेता ने कहा कि आरक्षण के कारण इन समुदायों को शुरुआती स्तर के पदों की नौकरियां तो मिल जाती हैं, मगर उसके बाद इनके लिए बड़े पदों तक पहुंच पाना नीतिगत भेदभाव के कारण लगभग असंभव हो जाता है। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘यह जानकर दुख तो हुआ, मगर आश्चर्य बिल्कुल नहीं कि इन बैंकों में शीर्ष पदों पर दलितों और आदिवासियों को कभी भी पहुंचने का मौका ही नहीं मिला। हर मंच से मैं यही सच्चाई दोहराता आया हूं।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘इसी भेदभाव, इसी अन्याय के खिलाफ हम लड़ रहे हैं। ये हालात हम मिलकर बदलेंगे, ताकि देश के हर वर्ग को हर संस्था में समान भागीदारी और हिस्सेदारी मिले।’’