पूजा का उद्घाटन देवीपक्ष से ही : सीएम

रीति रिवाजों से ही होगी पूजा : अष्टमी की पुष्पांजलि, नवमी की आरती, दशमी का सिंदूर खेला, दधिकर्मा और विसर्जन जैसे दुर्गापूजा के विभिन्न रीति-रिवाजों की परंपरा बनी रहेगी
पूजा का उद्घाटन देवीपक्ष से ही : सीएम
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : सीएम शुभेंदु अधिकारी ने सभी से एकजुट रहने का आह्वान किया ताकि कोई भी हमारे धर्म, रीति-रिवाजों और परंपराओं को किसी भी तरह से बदल न सके। शनिवार को गणेश पूजा के उद्घाटन समारोह से सीएम ने एकता का संदेश दिया। सीएम ने कहा कि तृणमूल शासन के दौरान बंगाल में धीरे-धीरे हमारी परंपराओं को बदल दिया गया था। उनका आरोप है कि अतीत में पितृपक्ष के दौरान ही दुर्गापूजा का उद्घाटन किया गया। इस बार दुर्गापूजा की समन्वय बैठक में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि पूजा का उद्घाटन मातृपक्ष या देवीपक्ष के दौरान, यानी महालया के दिन से किया जाएगा। उनका संदेश है कि अपने रीति रिवाजों से ही पूजा होगी। अष्टमी की पुष्पांजलि, नवमी की आरती, दशमी का सिंदूर खेला, दधिकर्मा और विसर्जन जैसे दुर्गापूजा के विभिन्न रीति-रिवाजों की परंपरा है और वह बनी रहेगी।

एंड ऑफ दी डे “हम सभी हिंदुस्तानी हैं”

सीएम ने कहा कि पहले यहां इतनी गणेश पूजा नहीं होती थी, कुछ लोग समझते थे कि गणेश पूजा महाराष्ट्र का है लेकिन ऐसा नहीं है। गणपति बप्पा पूरी पृथ्वी पर सभी सनातनियों के लिए हैं। कोई यह कहता कि मां दुर्गा की पूजा केवल कोलकाता की ही है जबकि ऐसा नहीं है। ये सभी सनातनियों की हैं। अभी लखनऊ और पटना में पूजा आयोजित होती है। किसी-किसी ने ऐसा परिवेश तैयार किया था कि छठ पूजा केवल बिहारी ही करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं गत दो वर्षों से देख रहा हूं, हमारी माँ बहनें भी सूर्य देवता को प्रणाम करती हैं और व्रत पालन करती हैं। यह जो एक दीवार बनाई गई थी कि तुम हिंदीभाषी, तुम गुजराती, तुम बंगाली, तुम मारवाड़ी इस दीवार को हमलोगों ने 2026 में तोड़ दिया है। एंड ऑफ दी डे हम सभी हिंदुस्तानी हैं ये देश हमारा है। हमलोगों ने अनेक लड़ाई करके बंगाली हिंदू होम लैंड पाया है। इसकी रक्षा करने का दायित्व हम सभी का है।

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